12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

10 दिन बाद धरती के बेहद करीब आने वाले है ये विशाल एस्टेरॉयड, NASA ने अलर्ट किया जारी

Trending: इस क्षुद्रग्रह का आकार लगभग 720 फुट का है। यानी एक एक 60 मंजिला इमारत जितना। इसके अलावा इस क्षुद्रग्रह की रफ्तार 25,000 मील प्रति घंटे की बताई गई है।

2 min read
Google source verification

Trending: अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने एक अलर्ट जारी किया है कि 5 सितंबर से 10 दिन बाद धरती के बेहद करीब एक विशाल क्षुद्रग्रह यानी एस्टेरॉयड गुजरेगा। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि ये क्षुद्रग्रह इतनी तेजी से धरती के करीब आ रहा है कि इसके धरती से टकराने की भी संभावनाएं भी नजर आ रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक इस एस्टेरॉयड की पल-पल की गतिविधियों को मॉनिटर कर रहे हैं और धरती को इस क्षुद्रग्रह से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

720 फुट का है ये क्षुद्रग्रह

NASA की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षुद्रग्रह का नाम 2024 ON रखा गया है। वहीं इसके धरती के वायुमंडल से टकराने या पास से गुजरने की तारीख 15 सितंबर बताई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एस्टेरॉयड करीब 720 फुट का है। इसकी चट्टान काफी आकर्षक है। आम भाषा में कहें तो ये क्षुद्रग्रह दो क्रिकेट पिच से भी बड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षुद्रग्रह के धरती से दूरी 620,000 मील रहने वाली है। लेकिन इसकी गति 25,000 मील प्रति घंटे की है, इसलिए वैज्ञानिकों में इसके धरती को कोई हानि पहुंचाने की चिंता बढ़ गई है।

कैसे की जा रही निगरानी

NASA के ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम’ से इस एस्टेरॉयड का पता लगाया गया है। क्षुद्रग्रह 2024 ON अपने महत्वपूर्ण आकार और गति के कारण कड़ी निगरानी में है। बता दें कि NASA का ये प्रोग्राम धरती के पास आने वाले पिंडों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने का काम करता है। ये क्षुद्रग्रह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से लगभग 2.6 गुना दूरी से गुजरेगा लेकिन वैज्ञानिकों ने इस दूरी को धरती के सबसे करीब बताया है। 

इसके अलावा कैलिफोर्निया के पासाडेना में स्थित जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) इस एस्टेरॉयड की हर गतिविधि पर नज़र रख रहा है। लैब उन्नत रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप के जरिए इसे देख रही है। इससे ये वैज्ञानिक कुछ अहम डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, जो इसके प्रभाव को समझने और किसी भी खतरे को कम करने के लिए योजनाएं बनाने में काम आएंगी।

ये भी पढ़ें- 18 साल बाद आसमान में दिखेगा ये अद्भुत नजारा, 7 महीने तक रुका हुआ नजर आएगा चांद