
‘Enough Is Enough!’ US Senator Questions Iran, : अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप प्रशासन से पूछ लिया बड़ा सवाल (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Iran US conflict: अमेरिकी राजनीति में विदेशों में सैन्य कार्रवाई और घरेलू जरूरतों पर सरकारी खर्च को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन हॉलन ने ईरान और क्यूबा को लेकर अमेरिकी नीति पर तीखी आपत्ति जताते हुए पूछा है कि आखिर ‘America First’ का वादा कहां चला गया। उनका कहना है कि करदाताओं का पैसा विदेशी संघर्षों में लगाने के बजाय अमेरिका के भीतर लोगों की जरूरतों और आर्थिक प्राथमिकताओं पर खर्च किया जाना चाहिए।
अमेरिका में विदेशी युद्धों की कीमत और घरेलू प्राथमिकताओं के बीच संतुलन को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सीनेटर क्रिस वैन हॉलन ने इसी मुद्दे को उठाते हुए ईरान और क्यूबा से जुड़ी अमेरिकी नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
वैन हॉलन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अब बहुत हो चुका। उनके मुताबिक, अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल ईरान पर हमले और क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के बजाय देश के भीतर निवेश के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि आखिर ‘America First’ एजेंडा कहां चला गया।
वैन हॉलन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान को लेकर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की लागत पर कांग्रेस में भी सवाल उठ रहे हैं। हाल में कई अमेरिकी सांसदों ने रक्षा विभाग से ईरान अभियान पर हुए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्च का विस्तृत हिसाब मांगा है। एक हालिया सीनेट पत्र में सांसदों ने अभियान की लागत और अतिरिक्त अरबों डॉलर की मांग का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की।
वैन हॉलन इससे पहले भी ईरान संघर्ष को लेकर अमेरिकी सैन्य खर्च पर चिंता जता चुके हैं। अप्रैल 2026 में उन्होंने कहा था कि युद्ध पर हर दिन अरबों डॉलर खर्च होने और घरेलू स्तर पर कीमतों पर असर पड़ने की चिंता है।
क्यूबा के मामले में भी अमेरिकी प्रतिबंध और आर्थिक दबाव लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। हाल के महीनों में क्यूबा पर अमेरिकी दबाव बढ़ने के बीच हवाना ने इन कदमों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाली नीति बताया है।
वैन हॉलन का ताजा बयान इसी बड़े सवाल को सामने लाता है अमेरिका की विदेश नीति में सुरक्षा और रणनीतिक हितों के साथ-साथ घरेलू खर्च की प्राथमिकताएं किस तरह तय की जाएं। उनके बयान ने ‘America First’ नारे के वास्तविक आर्थिक अर्थ पर बहस को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
Updated on:
24 Sept 2026 07:12 am
Published on:
24 Sept 2026 06:50 am
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