
पूर्व अमेरिकी NSA जॉन बोल्टन ने शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा पर खड़े किए सवाल, photo source@ANI
US China Relations: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर इस यात्रा से कोई ठोस नतीजा निकलता है, तो उन्हें हैरानी होगी। बोल्टन ने ANI से बातचीत में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह सोच कि विदेशी संबंधों को नेताओं के साथ निजी रिश्तों के चश्मे से देखा जाना चाहिए, शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे सख्त नेताओं से निपटने में एक गंभीर भूल साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेता अपने राष्ट्रीय हितों के आगे किसी व्यक्तिगत भावना को हावी नहीं होने देते, जबकि ट्रंप को दिखावे और भव्यता का शौक है।
बोल्टन ने कहा कि यह समिट भी ज्यादातर औपचारिकता भरी ही साबित होगी। उन्होंने बताया कि दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों नेता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर क्या कहते हैं, जिसे ट्रंप ने हाल ही में "सुपर इंटेलिजेंस" नाम दिया था, लेकिन उन्हें इससे भी कोई खास प्रगति निकलने की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, इस बैठक की सफलता की सबसे बड़ी पहचान यही होगी कि दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा न बिगड़ें, क्योंकि अहम मुद्दों पर किसी बड़े समझौते की जमीन अभी तैयार होती नहीं दिख रही।
बोल्टन ने आगाह किया कि अमेरिका-चीन वार्ता को महज दो आर्थिक प्रतिस्पर्धी लोकतांत्रिक देशों की बातचीत समझना गलत होगा। उन्होंने कहा कि चीन की मंशा इंडो-पैसिफिक, ईस्ट चाइना सी, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण एशिया (जहां भारत से सीमा विवाद भी है) में दबदबा कायम करने की है, और उसकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा वैश्विक वर्चस्व की है, जो बाकी दुनिया के लिए खतरनाक है।
बोल्टन ने यह भी बताया कि पहले चर्चा थी कि शी जिनपिंग के साथ एक बड़ा चीनी बिजनेस डेलिगेशन अहम व्यापारिक समझौतों का ऐलान करने आएगा, लेकिन ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डेलिगेशन यात्रा में साथ नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं हो पाई और यह पूरी यात्रा दिखावे पर भारी, लेकिन नतीजों में कमजोर साबित हो सकती है।
Updated on:
24 Sept 2026 04:04 am
Published on:
24 Sept 2026 04:04 am
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