
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रो. सिकंदर कुमार (फोटो-ANI)
India's response to Pakistan on Kashmir: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान को एकबार फिर जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि भारत अपने अधिकारों व गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जिनेवा में भारतीय राजदूत अरिंदम बागची ने कहा कि मानव गरिमा की रक्षा में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर अफ़सोस भी जताया कि आतंकवाद के पीड़ितों पर स्पष्ट ध्यान नहीं दिया गया।
भारतीय राजदूत अरिंदम बागची ने कहा कि मानव जीवन में कोई ऊंच-नीच नहीं होनी चाहिए। मानव गरिमा की रक्षा में कोई भेदभाव व दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। हमें अफसोस है कि आतंकवाद के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर स्पष्ट ध्यान नहीं दिया गया। इसके साथ ही, परिषद के 63वें सत्र के दौरान भारत ने जलवायु का भी मुद्दा उठाया। भारत ने किसानों को जलवायु के अनुकूल बीज उपलब्ध कराने का समर्थन किया। साथ ही विकसित देशों से कहा कि वे जलवायु के लिए वादा की गई वित्तीय मदद दें। मिशन ने नई दिल्ली में हुए AI इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “MANAV” विजन का जिक्र किया। फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने कहा कि AI का लोकतंत्रीकरण होना चाहिए और यह खासकर ग्लोबल साउथ में सबको साथ लेकर चलने और सशक्त बनाने का माध्यम बने।
भारतीय मिशन ने राइट ऑफ रिप्लाई का जवाब देते हुए भारत के हस्तक्षेपों को भी उजागर किया। काउंसलर क्षितिज त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उन आतंकवादियों ने घरों से निकाला, जिन्हें पाकिस्तान ने हथियार और प्रशिक्षण देकर सीमा पार भेजा था।
त्यागी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह दूसरों की जमीन का लालच करने और आतंकवाद का निर्यात करने के बजाय अपने लोगों के विकास पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि न तो ये हरकतें और न ही परिषद में की गई नाटकबाजी उन कर्जों को चुकाने में मदद करेगी, जिनके सहारे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चल रही है।
राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख़ अडिग है और देश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से चलता है। सिकंदर कुमार ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक समुदाय को राज्य-प्रायोजित और सीमा पार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
Updated on:
09 Oct 2026 09:21 am
Published on:
09 Oct 2026 08:40 am
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