
ईरान ने एक ही दिन में तीन बार अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है। (फोटो-AI)
Iran US war: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर दी जा रही चेतावनियां लगातार तेज होती जा रही है। आज एक ही दिन में ईरान की ओर से तीन कड़े बयान सामने आए हैं। इन तीनों ही बयानों के जरिए ईरान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई और IRGC के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने ये बयान दिए हैं। इन तीनों बयानों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर युद्ध फिर शुरू हुआ तो ईरान हर हाल में जवाब देगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश ईरान के खिलाफ किसी भी हमले की संभावना को खारिज नहीं करता है। आगे उन्होंने कहा कि हम हर तरह के हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। हमने अपने हथियारों को अपग्रेड किया है, अपनी कमियों को दूर किया है और नए हथियारों का परीक्षण किया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। उन्होंने माना कि अमेरिकी आर्थिक दबाव का असर ईरान पर पड़ा है, लेकिन कहा कि देश झुकेगा नहीं और इस मुश्किल दौर से अपनी ताकत के दम पर निकलेगा।
अराघची के इस बयान से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने सेना को किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देने का आदेश दिया है, चाहे इलाका कोई भी हो। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, यह निर्देश वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठक के बाद आया। उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन ने फिर सैन्य या आतंकी हमला किया, तो युद्ध कब और किन हालात में खत्म होगा, यह ईरान की सेना तय करेगी।
खामेनेई के कार्यालय के अनुसार कमांडरों ने गोला-बारूद, निगरानी उपकरणों, सहायक हथियारों और युद्धक हथियारों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया है। हालांकि बयान में न कोई आंकड़ा दिया गया। साथ ही उन्होंने सबसे अहम निर्देश हमले के ठिकानों से जुडे दिए। खामेनेई ने सशस्त्र बलों से टारगेट अपडेट करने को कहा और कहा कि अमेरिका और इजरायल की सभी संपत्तियां ईरान की पहुंच में होनी चाहिए।
खामेनेई से पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने एक्स पर लिखा कि उनकी सेना क्षेत्र में अमेरिका की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने ट्रंप और इजरायल को चेतावनी दी कि कोई नया दुस्साहस हुआ तो करारा जवाब मिलेगा। उनके मुताबिक दोबारा भड़की जंग की लपटें बड़े इलाके को चपेट में लेंगी और इसका हल निकालना अमेरिका और ट्रंप के हाथ में भी नहीं होगा।
Updated on:
31 Oct 2026, 8:33 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 8:33 PM IST
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