
Israel Election 2026:इजरायल में त्रिशंकु मुकाबला: नेतन्याहू और विपक्ष 51-51 सीटों पर बराबरी पर, बहुमत से 10 कदम दूर (फोटो सोर्स: ANI)
Israel Election 2026: इजरायल के चुनावी नतीजों ने देश की राजनीति में ऐसा मोड़ ला दिया है, जहां सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना आसान नहीं दिख रहा। संसद में बहुमत से पीछे रह गए नेतन्याहू के सामने विपक्ष की चुनौती है, लेकिन विपक्ष के पास भी जरूरी आंकड़ा नहीं है। ऐसे में 19 सीटें जीतने वाले अरब राजनीतिक दल सत्ता की चाबी बनकर उभरे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ये दल किसका समर्थन करेंगे।
इजरायल के अंतिम चुनाव परिणामों के मुताबिक, 120 सदस्यीय संसद नेसेट में बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। विपक्षी दलों के खाते में 48 सीटें आईं, जबकि अरब राजनीतिक दलों ने कुल 19 सीटें हासिल कीं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इस लिहाज से किसी भी खेमे के पास फिलहाल स्पष्ट बहुमत नहीं है।
| श्रेणी | आंकड़े |
|---|---|
| इजरायली संसद (नेसेट) की कुल सीटें | 120 |
| बहुमत के लिए जरूरी सीटें | 61 |
| बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन वाला गठबंधन | 53 |
| नेतन्याहू विरोधी खेमे की सीटें | 48 |
| जॉइंट लिस्ट की सीटें | 12 |
| राम (Ra'am) पार्टी की सीटें | 7 |
| मतदान समाप्त होने तक कुल मतदान | 77.7% |
| वर्ष 2022 में मतदान प्रतिशत | 70.6% |
| मतदान प्रतिशत में वृद्धि | 7.1 प्रतिशत अंक |
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। वहीं, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। अरब दलों में जॉइंट लिस्ट ने 11 और मंसूर अब्बास की राम पार्टी ने आठ सीटें जीती हैं। इन दोनों का समर्थन सरकार गठन की दिशा बदल सकता है।
अरब राजनीतिक दलों के बीच भी सरकार को समर्थन देने के तरीके पर एकराय नहीं है। मंसूर अब्बास की राम पार्टी वर्ष 2021 में नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड की गठबंधन सरकार में शामिल हो चुकी है। इसलिए उसके एक बार फिर नेतन्याहू विरोधी सरकार को समर्थन देने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
दूसरी ओर, जॉइंट लिस्ट के घटक दल सरकार में सीधे शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, अब्बास ने आइजेनकोट के नेतृत्व में बाहर से समर्थन पर आधारित अल्पमत सरकार बनने की संभावना को लेकर संदेह जताया है। इससे विपक्ष की रणनीति और जटिल हो गई है।
नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश में विपक्षी नेताओं के विचार भी अलग-अलग हैं। एविग्दोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी अरब दलों के साथ सरकार बनाने या उनके समर्थन पर निर्भर रहने के पक्ष में नहीं बताई जा रही। इसके विपरीत, यायर गोलान अरब दलों के साथ सहयोग कर वैकल्पिक सरकार बनाने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने राम प्रमुख मंसूर अब्बास से मुलाकात कर संभावित राजनीतिक साझेदारी पर चर्चा भी की है।
इसी बीच, हर्जलिया में आइजेनकोट के आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने अरब दलों के साथ सहयोग करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों का मानना है कि नेतन्याहू को सत्ता से दूर रखने के लिए राजनीतिक साझेदारी जरूरी है।
बहुमत से आठ सीटें पीछे होने के बावजूद नेतन्याहू की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उनकी लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है और वे दूसरे दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं, लिकुड, याशर, नफ्ताली बेनेट की ब'याचद और लिबरमैन की पार्टी के बीच व्यापक गठबंधन का गणित 66 सीटों तक पहुंच सकता है। हालांकि, नेतन्याहू को हटाने के विपक्षी दलों के चुनावी वादे के कारण ऐसा गठबंधन मुश्किल नजर आता है।
चुनाव परिणाम 4 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाने हैं। इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श कर सरकार बनाने के लिए किसी उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे। नई संसद के सदस्यों का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है। यदि तय समयसीमा में सरकार नहीं बनती, तो इजरायल को दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।
Updated on:
30 Oct 2026, 12:02 PM IST
Published on:
30 Oct 2026, 11:39 AM IST
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