
सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही (फोटो- Planet Labs )
Nepal flood satellite images: नेपाल-तिब्बत (चीन) बॉर्डर पर हिमालय के एक ग्लेशियर के टूटने से आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस ने अब तक कम से कम 359 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 1,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। बाढ़ के बाद 'प्लैनेट लैब्स' की जारी की गई पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कैसे पानी और मलबे के भारी सैलाब की वजह सड़क और बिल्डिंग पूरी तरह गायब हो गए। दुर्गम इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हालांकि, तबाह हो चुके रास्तों और पुलों के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद के हालात की तुलना की गई है। तस्वीरों में सयाप्रू बेसी गांव का एक बड़ा हिस्सा मलबे के नीचे दबा हुआ दिख रहा है। कई जगहों पर, बाढ़ के तेज पानी की वजह से सड़कें और इमारतें पूरी तरह से गायब हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 19 मोटर-योग्य पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई या बह गई।
बुधवार सुबह लगभग 8:40 बजे तिब्बत में ल्हेंडे नदी के ऊपरी इलाकों में एक विशाल ग्लेशियर ढह गया। इसके कारण बर्फ और चट्टानों का मलबा नदी के बहाव में रुकावट बन गया और एक अस्थायी झील बन गई, जब यह रुकावट आखिरकार टूटी, तो पानी का एक तेज बहाव सीमा पार कर गया और नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, ल्हेंडे नदी का बाढ़ का पानी पहले भोटे कोशी और फिर त्रिशूली नदी में आ गया। त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट में 9 मीटर (लगभग 30 फीट) बढ़ गया। रसुवा के तिमुरे और स्याप्रुबेसी से शुरू हुई तबाही नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुं, चितवन और नवलपरासी ज़िजिलों तक फैल गई। तिब्बत के शिगात्से में स्थित 'ग्यिरोंग पोर्ट' भी मलबे की चपेट में आ गया। आगे चलकर त्रिशूली नदी नारायणी नदी बन जाती है और भारत के बिहार राज्य में प्रवेश करती है, जहां इसे गंडक नदी के नाम से जाना जाता है।
हालात की गंभीरता के बारे में समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए प्रभावित इलाके में पहुंचे नेपाल बचाव दल के अधिकारी बिमल ने बताया कि बाढ़ बहुत तेजी और अचानक से आई। पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कोई पहले से चेतावनी नहीं दी जा सकी। दुख की बात है कि जो अधिकारी अलर्ट जारी करने के लिए तैनात थे, वे ही पानी के तेज बहाव में बह गए और हमारी बचाव टीम भी इसकी चपेट में आ गई। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बना सारा इंफ्रास्ट्रक्चर मलबे में बदल गया है।
Updated on:
27 Aug 2026 09:40 pm
Published on:
27 Aug 2026 09:37 pm
