30 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

फिलिस्तीनी पत्रकार बना युद्ध का शिकार, इज़रायली ड्रोन हमले में हुई मौत

Israel-Hamas War: गाज़ा में इज़रायली हमले जारी हैं! इज़रायली हमले में अब अब फिलिस्तीनी पत्रकार की मौत हो गई!
2 min read
Google source verification

भारत

•

image

Tanay Mishra

•

Sep 30, 2026

Israeli attacks in Gaza

इज़रायली सेना ने गाज़ा में किए हमले (File Photo)

इज़रायल (Israel) और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास (Hamas) के बीच चल रहे युद्ध की वजह से गाज़ा (Gaza) में हाहाकार मचा हुआ है! इज़रायली हमलों की वजह से गाज़ा में हर दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है! इज़रायली सेना के निशाने पर हमास के आतंकी और इसके नेटवर्क से जुड़े लोग तो हैं ही, लेकिन सैन्य हमलों में निर्दोष नागरिक भी मारे जा रहे हैं! यहाँ तक कि ऐसे पत्रकार जो खतरे के बीच में भी अपना काम कर रहे हैं, वो भी इस युद्ध में सुरक्षित नहीं हैं! इज़रायली हमले में अब एक और फिलिस्तीनी पत्रकार मारा गया है!

इज़रायली ड्रोन हमले में फिलिस्तीनी पत्रकार की मौत

एक और फिलिस्तीनी पत्रकार इज़रायल की सैन्य कार्रवाई की भेंट चढ़ गया है! नासेर मेडिकल कॉम्प्लेक्स की रिपोर्ट के अनुसार गाज़ा के खान यूनिस शहर के उत्तर में अल-मवासी इलाके में इज़रायली सेना ने ड्रोन हमला किया! इस हमले में फिलिस्तीनी पत्रकार मोहम्मद अल-नज्जर (Mohammed al-Najjar) की मौत हो गई है।

इज़रायली हमलों में मारे गए हैं कई फिलिस्तीनी पत्रकार

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली प्रमुख स्वतंत्र संस्था 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) की रिपोर्ट के अनुसार 7 अक्टूबर 2023 को युद्ध शुरू होने के बाद से गाज़ा में इजरायली सेना के हमलों में 100 से ज़्यादा फिलिस्तीनी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों ने अपनी जान गंवाई है। गाज़ा के सरकारी मीडिया ऑफिस ने बताया कि सितंबर 2026 के आखिर तक इज़रायली हमलों की वजह से गाज़ा में 262 फिलिस्तीनी पत्रकार और मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं।

पत्रकारों की मौत के मामले में क्या है इज़रायल का पक्ष?

गाज़ा में चल रहे युद्ध की वजह से वैसे ही इज़रायल की दुनियाभर में आलोचना हो रही है। पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की मौत पर भी इज़रायल को निंदा का सामना करना पड़ता है। हालांकि इज़रायल का कहना है कि उसकी सेना जान-बूझकर पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को निशाना नहीं बनाती है और मारे गए पत्रकारों में से कुछ हमास या दूसरे हथियारबंद गुटों के सदस्य थे या उनसे जुड़े थे। इज़रायल का कहना है कि कुछ पत्रकार असल में हमास या किसी दूसरे संगठन के लिए काम कर रहे थे और जंग में शामिल थे रूप से शामिल थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।