
Donald Trump Iran Attack : ईरान के खिलाफ जंग में ट्रंप का बड़ा कबूलनामा, बोले- नेताओं को मारने में शायद कुछ ज्यादा आगे निकल गए(फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
US Iran Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को बड़ी सफलता बताकर अपने समर्थकों के बीच नया जोश जरूर भर दिया, लेकिन उनके एक बयान ने काफी विवाद खड़ा कर दिया है। आयोवा में रिपब्लिकन सपोर्टर्स के सामने भाषण देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ताकत को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। मगर, जब बात आई ईरान के टॉप लीडरशिप को निशाना बनाने की, तो ट्रंप की बातों ने युद्ध की रणनीति और आगे की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।
डब्यूक में चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने दो टूक कहा कि ईरान पिछले कई दशकों से अमेरिका के खिलाफ साजिश करता रहा है। ट्रंप का कहना है, 1979 की क्रांति के बाद से ही अमेरिकी हित लगातार ईरानी हमलों के निशाने पर रहे हैं। उन्होंने अपने समर्थकों को समझाने की कोशिश की कि ये सैन्य कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि बरसों से जारी इरानी धमकियों और हमलों का जवाब है।
ईरान को आतंकवाद का सबसे बड़ा मददगार बताते हुए ट्रंप ने खुलकर आरोप लगाया कि तेहरान लंबे वक्त से अमेरिकी सैनिकों और दोस्तों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। ट्रंप ने 2000 में यमन के अदन पोर्ट पर अमेरिकी जहाज यूएसएस कोल पर हुए हमले की भी याद दिलाई हालांकि, इसकी जिम्मेदारी अलकायदा ने ली थी। इसके अलावा, इराक समेत कई जगह अमेरिकी सैनिकों के काफिले पर हुए सड़क किनारे बम धमाकों का भी जिक्र आया, जिनके लिए ट्रंप ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया और अपनी सैन्य नीति का मजबूती से बचाव किया।
अपने पहले कार्यकाल की उपलब्धियों की बात करते हुए ट्रंप ने कासिम सुलेमानी की हत्या को खासतौर पर गिनाया। जनवरी 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मारा गया सुलेमानी ईरान की कुद्स फोर्स का सबसे बड़ा कमांडर था और ट्रंप के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों पर हुए ब्लास्ट्स के पीछे उसी का हाथ था। ट्रंप का तर्क यही रहा कि सुलेमानी को मारकर अमेरिका ने अपने जवानों की सुरक्षा को पुख्ता किया।
रैली में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की हालिया कार्रवाई में ईरान की नौसेना, वायुसेना और रडार सिस्टम बुरी तरह तबाह हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की एंटी-एयरक्राफ्ट कैपेसिटी लगभग खत्म हो गई है और उसके कई आला नेता अब बाकी नहीं हैं।
इसी बीच, ट्रंप की कही एक बात सुर्खियों में रही उन्होंने माना कि शायद अमेरिका ने ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाते वक्त ‘कुछ ज्यादा ही आगे’ बढ़ा दिया है। उन्होंने चिंता जताई कि अब जब बातचीत का वक्त है, तो दूसरा पक्ष ही मौजूद नहीं बचा है जिससे बात हो सके। ये लाइनें इस युद्ध की दिशा और उससे जुड़े खतरे साफ दिखाती हैं।
चुनावी माहौल के बीच ट्रंप की ये बातें और भी अहम हो जाती हैं। चुनाव बस अगले दिन थे, और ट्रंप ने अपनी पूरी ताकत से ईरान के खिलाफ सख्त रवैया एक उपलब्धि के तौर पर लोगों के सामने रखा। मगर, ये भी दिखता है कि सैन्य सफलता और राजनीतिक हल, दोनों अलग बातें हैं। किसी देश की ताकत कम करना आसान है, लेकिन स्थायी समाधान और क्षेत्रीय शांति लाना कहीं ज्यादा मुश्किल। असल सफलता सिर्फ ईरान का सैन्य नुकसान नहीं है, बल्कि आगे चलकर वहां स्थिरता और डिप्लोमैटिक समाधान लाना ही असली चुनौती है।
Updated on:
2 Nov 2026, 9:30 AM IST
Published on:
2 Nov 2026, 9:05 AM IST
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