
अमेरिकी सेना। (फोटो- X/@USARPAC)
अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर अगस्त में खाने-पीने का सामान रखने वाले फ्रीजर में अचानक खराबी आ गई। इस मामले में पेंटागन को शक है कि इस घटना के पीछे साइबर हमला हो सकता है। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, कुछ जगहों पर फ्रीजर का तापमान अचानक बढ़ा दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में खाने-पीने के आइटम खराब हो गए।
इस मामले ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि फ्रांस में भी इसी तरह का साइबर हमला सामने आया था, जिसमें सुपरमार्केट के फ्रीजरों के तापमान से छेड़छाड़ की गई थी। अमेरिकी जांचकर्ता इस मामले को समझने के लिए फ्रांस के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के आखिरी दिनों में अमेरिका के छह सैन्य ठिकानों पर मौजूद दुकानों के फ्रीजर में गड़बड़ी हुई थी। एरिजोना स्थित फोर्ट हुआचुका सैन्य ठिकाने के फेसबुक पेज पर 26 अगस्त को बताया गया था कि वहां का फ्रीजर डिफ्रॉस्ट मोड में चला गया। इस दौरान मशीन ने ठंडा करने के बजाय गर्मी पैदा की, जिससे अंदर रखा खाना खराब हो गया।
कुछ मामलों में फ्रीजर का तापमान बढ़ने से खाद्य सामग्री पिघल गई या इस्तेमाल के लायक नहीं रही। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या किसी ने दूर बैठकर इन मशीनों की सेटिंग बदली थी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जांच किस चरण में है और इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है।
अमेरिकी जांचकर्ताओं का ध्यान फ्रांस में हाल ही में हुए ऐसे ही हमले पर भी है। वहां 350 से ज्यादा प्रतिष्ठानों में लगे व्यावसायिक फ्रीजरों के तापमान को हैक करके बदल दिया गया था। इससे सुपरमार्केट में रखा बड़ी मात्रा में जमे हुए खाद्य पदार्थ खराब हो गए।
कुछ जगहों पर तापमान इतना बढ़ गया कि फ्रीजर में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। एक सुपरमार्केट संचालक ने अनुमान जताया था कि इस हमले से फ्रांस में कुल नुकसान करोड़ों यूरो तक पहुंच सकता है।
अब अमेरिकी सेना की आपराधिक जांच इकाई ने बताया कि उसका साइबर कार्यालय इस मामले की जांच कर रहा है। साथ ही, यूरोप में हुई रेफ्रिजरेशन संबंधी गड़बड़ियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए फ्रांस की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है। पेंटागन ने भी पुष्टि की कि साइबर कमांड की एक इकाई अन्य सरकारी एजेंसियों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्रीजर और कूलिंग सिस्टम को चलाने वाले पुराने कंट्रोलर हैकरों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं। डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस ने बताया था कि प्रभावित फ्रांसीसी इकाइयों में इस्तेमाल किए गए कई कंट्रोलर पुराने थे या उनमें अपडेटेड सॉफ्टवेयर नहीं था। हालांकि, यह पता नहीं चला है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी इसी कंपनी के कंट्रोलर लगे थे या नहीं।
Updated on:
29 Oct 2026, 6:59 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 6:59 PM IST
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