
आइसेनकोट का नेतन्याहू पर हमला, शिन बेट से निष्पक्ष जांच की मांग, Photo- ANI
Israel Foreign Interference: इजरायल के विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट ने गुरुवार (स्थानीय समयानुसार) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के दावों का इस्तेमाल नतीजों को कमजोर करने और 26वीं नेसेट (इजरायली संसद) के गठन में देरी करने के लिए कर रहे हैं।
'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, 'यशार' पार्टी के नेता आइसेनकोट ने चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि नतीजों की वैधता पर सवाल उठाने के लिए बिना पुष्टि किए गए आरोपों का फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।
आइसेनकोट ने कहा, "नेतन्याहू, जो झूठ बोलने, लोगों की सोच को प्रभावित करने (consciousness engineering) और अराजकता फैलाने के जरिए हकीकत से निपटने के आदी हो चुके हैं, अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इजरायली जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। इसका मकसद चुनाव नतीजों को समय पर जारी होने से रोकना और 26वीं नेसेट की गतिविधियों को अवैध ठहराने की कोशिश करना है।
आधिकारिक चुनाव नतीजों को कमजोर करने के लिए ऐसी जानकारी (जिसकी अभी तक जांच नहीं हुई है और जिसके विवरण या संदेह का दायरा भी स्पष्ट नहीं है) का इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है और इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया जाना चाहिए। इन नतीजों में इजरायली जनता ने 'विफल सरकार' के खिलाफ वोट दिया है।
उन्होंने इजरायली मामलों में कतर की कथित संलिप्तता की निंदा करने के लिए नेतन्याहू की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, "मैं इजरायल के मामलों में कतर की संलिप्तता की निंदा करने के लिए नेतन्याहू की सराहना करता हूं। इजरायल में विदेशी हस्तक्षेप एक अस्वीकार्य और बेहद गंभीर मामला है, खासकर तब जब इसमें ऐसा देश शामिल हो जो हमास संगठन को फंड देता है और उसका समर्थन करता है।
अगर ऐसा प्रधानमंत्री कार्यालय में होता है, तो यह बहुत गंभीर बात है, और अगर ऐसा चुनाव प्रणाली में होता है, तो यह और भी गंभीर है।" “शिन बेट को इन संदेहों की निष्पक्ष, गहन और तत्काल जांच करनी चाहिए। जो कोई भी चुनावों की अखंडता को नुकसान पहुंचाते हुए या ऐसा करने की कोशिश करते हुए पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। चुनावों से जुड़ा हर फैसला पूरी गंभीरता के साथ लिया जाना चाहिए, और यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि 26वीं नेसेट (इजरायली संसद) का गठन समय पर हो। लोकतांत्रिक चुनावों में मतदाताओं की इच्छा का सम्मान करना इजरायली लोकतंत्र और राष्ट्रीय मजबूती का एक बुनियादी हिस्सा है,” आइसेनकोट ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि जो कोई भी चुनावों की अखंडता से समझौता करते हुए या ऐसा करने की कोशिश करते हुए पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
Updated on:
29 Oct 2026, 6:09 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 5:59 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.