
Muhammed yunus
Muhammad Yunus: बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद एक देश की कमान संभालने जा रहे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) भारत आ चुके हैं। उनके फ्रांस की राजधानी पेरिस से गुरुवार दोपहर को बांग्लादेश लौटने की उम्मीद है।
व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सोमवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह, भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के एक प्रमुख समन्वयक नाहिद इस्लाम ने बंगभवन के बाहर संवाददाताओं को सूचित किया कि अंतरिम सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 24 घंटे या उससे थोड़ा अधिक समय के भीतर हो सकता है।
बांग्लादेश की नई तकदीर लिखने वाले मुहम्मद यूनुस सुर्खियों में हैं। उनका जन्म 28 जून 1940 को हुआ। वे एक बांग्लादेशी उद्यमी, बैंकर, अर्थशास्त्री और नागरिक समाज के नेता हैं। यूनुस को ग्रामीण बैंक की स्थापना और माइक्रोक्रेडिट और माइक्रोफाइनेंस की अवधारणाओं को आगे बढ़ाने के लिए 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । उन्हें अमेरिका सहित कई अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले हैं। वहीं सन 2009 में यूनाइटेड स्टेट्स प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ़ फ़्रीडम और 2010 में कांग्रेसनल गोल्ड मेडल मिला है। उनहें शेख हसीना के इस्तीफ़े के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है।
मुहम्मद यूनुस सन 2012 में स्कॉटलैंड में ग्लासगो कैलेडोनियन विश्वविद्यालय के चांसलर बने थे। वे इस पद पर सन 2018 तक रहे। इससे पहले, वे बांग्लादेश में चटगाँव विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे । उन्होंने अपने वित्त कार्य से संबंधित कई पुस्तकें प्रकाशित कीं। वे ग्रामीण अमेरिका और ग्रामीण फाउंडेशन के संस्थापक बोर्ड के सदस्य हैं, जो माइक्रोक्रेडिट का समर्थन करते हैं। यूनुस ने 1998 से 2021 तक संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन के निदेशक मंडल में भी काम किया है, जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए एक सार्वजनिक दान है ।
गौरतलब है कि बांग्लादेशी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 6 अगस्त 2024 को संसद भंग करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद छात्रों की मांगों के अनुसार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में यूनुस को नामित किया है। उनका 8 अगस्त को रात 8 बजे शपथ लेने का कार्यक्रम है।
प्रारंभिक वर्षों यूनुस एक बॉय स्काउट के रूप में बीता और सन 2003 में युनुस चटगाँव जिले के हाथजारी में कपटई रोड के पास बथुआ गांव में मुस्लिम सौदागरों के एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता हाजी दुला मिया सौदागर, एक जौहरी थे, और उनकी माँ सूफिया खातून थीं। उनका शुरुआती बचपन गाँव में बीता। सन 1944 में, उनका परिवार चटगाँव शहर चला गया , और वह अपने गाँव के स्कूल से लामाबाजार प्राइमरी स्कूल में चले गए। सन 1949 तक, उनकी माँ मनोवैज्ञानिक बीमारी से पीड़ित हो गईं।
उन्होंने चटगाँव कॉलेजिएट स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की और अपने स्कूल के दिनों में, वह एक सक्रिय बॉय स्काउट थे। उन्होंने 1952 में पश्चिमी पाकिस्तान और भारत की यात्रा की, और 1955 में जाम्बोरीज़ में भाग लेने के लिए कनाडा गए । बाद में, जब यूनुस चटगाँव कॉलेज में पढ़ रहे थे , तब वे सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए और नाटक के लिए पुरस्कार जीते। सन 1957 में, उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग में दाखिला लिया और 1960 में बीए और 1961 में एमए पूरा किया।
स्नातक होने के बाद, यूनुस नूरुल इस्लाम और रहमान सोभन के अर्थशास्त्र शोधकर्ताओं के लिए एक शोध सहायक के रूप में अर्थशास्त्र ब्यूरो में शामिल हो गए । बाद में, उन्हें 1961 में चटगाँव कॉलेज में अर्थशास्त्र में व्याख्याता नियुक्त किया गया। उस दौरान, उन्होंने एक लाभदायक पैकेजिंग फैक्ट्री भी स्थापित की । सन 1965 में, उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्ययन करने के लिए फुलब्राइट छात्रवृत्ति मिली। उन्होंने 1971 में वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट प्रोग्राम इन इकोनॉमिक डेवलपमेंट (जीपीईडी) से अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की। वहीं 1969 से 1972 तक, यूनुस मर्फ़्रीसबोरो में मिडिल टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर थे ।
मुहम्मद यूनुस ने सन 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान एक नागरिक समिति की स्थापना की और मुक्ति के लिए समर्थन जुटाने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में अन्य बांग्लादेशियों के साथ बांग्लादेश सूचना केंद्र चलाया। उन्होंने नैशविले में अपने घर से बांग्लादेश न्यूज़लेटर भी प्रकाशित किया । युद्ध के बाद, वे बांग्लादेश लौटे और नूरुल इस्लाम की अध्यक्षता में सरकार के योजना आयोग में नियुक्त हुए। हालांकि, उन्हें नौकरी उबाऊ लगी और उन्होंने चटगांव विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख के रूप में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया।
वे सन 1974 के अकाल को देखने के बाद गरीबी कम करने के काम में शामिल हो गए और एक शोध परियोजना के रूप में एक ग्रामीण आर्थिक कार्यक्रम की स्थापना की। 1975 में, उन्होंने एक नबाजुग (नया युग) तेभागा खमार (तीन शेयर फार्म ) विकसित [20] 1970 के दशक के अंत में राष्ट्रपति जियाउर रहमान की ओर से पेश की गई सरकार ने 2003 में सरकार की चौथी परत के रूप में 40,392 ग्राम सरकारों का गठन किया। वहीं 2 अगस्त 2005 को, बांग्लादेश लीगल एड एंड सर्विसेज ट्रस्ट (BLAST) की एक याचिका के जवाब में, उच्च न्यायालय ने ग्राम सरकारों को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दिया गया।
Updated on:
07 Aug 2024 07:56 pm
Published on:
07 Aug 2024 07:56 pm
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