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इस जगह से आज खरीद सकेंगे पटाखे

तीन वर्षों के अनुसार इस बार भी दीपावली महापर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए पटाखा बाजार रविवार से आबादी से दूर कंठाल नदी के उस पार मेला ग्राउंड में लगेगा।

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तीन वर्षों के अनुसार इस बार भी दीपावली महापर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए पटाखा बाजार रविवार से आबादी से दूर कंठाल नदी के उस पार मेला ग्राउंड में लगेगा।

सुसनेर. तीन वर्षों के अनुसार इस बार भी दीपावली महापर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए पटाखा बाजार रविवार से आबादी से दूर कंठाल नदी के उस पार मेला ग्राउंड में लगेगा। इसे लेकर शनिवार को व्यापारियों ने पंडाल लगाकर दुकानें सजाने का काम शुरू कर दिया। कुछ व्यापारियों ने दुकानें भी सजा ली।
नगर परिषद ने तीन दिन पहले ही दुकानें चिह्नित कर आवंटन कर दिया है। उसके बाद से व्यापारी कारोबार करने के लिए तैयारियों में जुट गए। अतिशबाजी के लिए विशेष तौर पर बेचे जाने वाले पटाखों का बाजार त्योहारी हाट रविवार से सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सूने मेला ग्राउंड क्षेत्र में सजने लगा है। यहां आज से चहल पहल दिखाई देने लगेगी। लाइसेंसधारी पटाखा व्यवसायी पटाखों का विक्रय कर सकेंगे। 40 से भी अधिक व्यापारी त्योहारी हाट से भाईदूज तक दुकान लगाते हैं। मावि ग्राउंड में लगने वाला यह बाजार तीन वर्षों से मेला ग्राउंड में लग रहा है। दुकानें व्यवस्थित क्रम से लगें इसलिए नगर परिषद ने सीमांकन कर व्यापारियों को दुकानों का आवंटन किया है। साथ ही आग से बचाव के लिए पानी के टैंकर व फायर फाइटर की व्यवस्था की है। रात में प्रकाश के इंतजाम भी किए हैं।
पशु शृंगार का बाजार भी सजा
मेला ग्राउंड में ही पशुओं के शृंगार सामग्री का बाजार भी सज गया है। पूरे मैदान में आगे की एक लाइन में पटाखों की दुकानें सजना शुरू हो गई हैं तो पीछे की ओर पशुओं को सजाने के सामानों की दुकानें। शनिवार को ग्रामीणों ने यहां खरीदी की।
सुसनेर. दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा सदियों की है पर इधर कुछ सालों से देखा जा रहा है कि कई घरों में मिट्टी के दीये नाम मात्र जलाए जा रहे हैं। इनकी जगह लोग चायनीज दीयों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि यह पर्यावरण और भारतीय संस्कृति के अनुकूल नहीं हैं। इससे कुम्हारों के व्यवसाय को भी क्षति पहुंच रही है।
मिट्टी के दीयों को अलग-अलग आकार देना व इनको सजाना एक कला है। आज के आधुनिक युग में इसको जीवित रखना बेहद जरूरी है। इसलिए इस बार पर्यावरण सरंक्षण के लिए इको फ्रेंडली दीपावली मनाते हुए कुम्हारों से मिट्टी के दीप खरीदकर इनकी दीपावाली रोशन करने का प्रयास करें।
मिट्टी के दीये जलाने के लाभ
शास्त्रों के अनुसार मिट्टी के दीये हमेशा पवित्र माने जाते हैं। जिस घर में हर दिन दीपक जलाया जाता है। वहां सुख-समृद्धि हमेशा कायम रहती है। दूसरी बात यह सर्वसुलभ है। जिन घरों में आय का अच्छा स्रोत नहीं है, वहां भी मिट्टी के दीये आसानी से खरीदे जा सकते हैं। तीसरी बात यह है कि जब हर घर में दीये जलाए जाएंगे तो सभी जगह समानता दिखेगी। इससे उस उत्सव की सार्थकता भी बरकरार रहेगी।
परंपरा भी रहेगी जीवित
साहित्यकार डॉ. रामप्रताप भावसार सुसनेरी कहते हैं कि अब युवाओं को इस परंपरा को जीवित रखने का अथक प्रयास करना होगा। इसलिए शहर के कौने-कौने में जाकर मिट्टी के दीये जलाने के लिए प्रेरित करना होगा।