
पुलिस की गिरफ्त में साइबर ठगी के आरोपी। पत्रिका फाइल फोटो
मनीष कुमार सिंह
अजमेर। देशभर में साइबर ठगी की ‘लाइन’ चलाने वाले अजमेर के गिरोह की पहुंच कम्बोडिया और मलेशिया में बैठे कथित आकाओं तक है। रामगंज थाना पुलिस की 1100 पेज की चार्जशीट में सामने आया है कि गिरोह ने डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर ठगी के हथकंडों से ठगी की रकम को बैंक खातों में घुमाने के बाद यूएसडीटी से विदेश भेजने का अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है।
अजमेर नेटवर्क के सरगना सबरे आलम व उसके साथियों ने महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली व तेलंगाना के 7 खातों से 3 करोड़ 60 लाख 25 हजार रुपए साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की थी। सबरे आलम समेत 7 आरोपी जहां जेल की सलाखों के पीछे धकेले जा चुके है, वहीं गिरोह की अहम दो कड़ियां लोकेश भाटी और महावीर जाट उर्फ माही हैं। दोनों अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
थानाप्रभारी हरिपाल सिंह ने बताया कि साइबर ठगी के मामले में स्थानीय नेटवर्क के सरगना लोहाखान के सबरे आलम, प्रवीन भाटी, ध्रुव सुकरिया, सुनील कुमार, प्रिंस यादव, किशनगढ़ के मनीष व फॉयसागर रोड के राजेन्द्र को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 1100 पेज की चार्जशीट पेश की है। वहीं अलवरगेट क्षेत्र के गुर्जर धरती निवासी लोकेश भाटी और नागौर निम्बोला वास निवासी महावीर जाट उर्फ माही की तलाश जारी है। दोनों के संबंध में अनुसंधान लंबित रखा गया है।
पुलिस पड़ताल में आया कि सबरे आलम, लोकेश व महावीर जाट उर्फ माही के लिए काम करता था। लोकेश व महावीर कथितरूप से साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, विड्रॉल चार्ज, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। फिर ठगी से मिलने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के बाद में रकम यूएसडीटी से विदेश भेज देते हैं। प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि सबरे आलम कम्बोडिया जा चुका है। उसने ठगी की ट्रेनिंग भी विदेश में ली है। पुलिस का मानना है कि लोकेश व महावीर उर्फ माही की गिरफ्तारी के बाद साइबर नेटवर्क की कार्यप्रणाली, विदेश में बैठे कथित आकाओं और रकम को विदेश भेजने के रास्तों की अहम जानकारी सामने आ सकती है।
पुलिस जांच में आया कि सबरे आलम और उसके गिरोह के बैंक खातों की शुरूआती पड़ताल में ही करोड़ों का लेनदेन सामने आया है। जिसे पुलिस ने बतौर सबूत शामिल किया है। गिरोह का शिकार होने वालों में मुम्बई के चन्द्रकांत से एक करोड़ 30 लाख रुपए, मनोज फेने के 40 लाख, पुणे की श्रेया जादव के 2.50 लाख व पुणे की दिपाली के 2.70 लाख रुपए, हैदराबाद की श्रीदेवी के एक लाख, यूपी गाजियाबाद के नरेन्द्र कुमार के एक करोड़ 37 लाख, गाजियाबाद की श्वेता के 47 लाख रुपए की रकम उनके खातों में ट्रांजेक्शन और निकासी से जुड़ी मिली। जोकि साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा की रकम है।
थानाप्रभारी हरिपाल सिंह ने बताया कि पुलिस जांच में गिरोह के अपराध के तरीके में साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट व विड्रॉल चार्ज जैसे हथकंडे सामने आए हैं। ठगी के बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाने और फिर उसे विदेश में ट्रांसफर करने के लिए डॉलर समर्थित यूएसडीटी नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं जोकि क्रिप्टो टोकन के लेन-देन में ब्लॉकचेन नेटवर्क पर आधारित होता है। इसे सीमापार धन ट्रांसफर के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
गत 28 जुलाई की रात को रामगंज थाना पुलिस ने ब्यावर रोड रेलवे अस्पताल के पास संदिग्ध हालात में खड़े 7 युवकों को पकड़ा। प्रारंभिक पड़ताल में युवक संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्हें थाने ले जाकर गहनता से पड़ताल की तो कुछ साथी टूट गए। उन्होंने गिरोह का राज उगलते हुए साइबर ठगी की रकम के लिए बैंक खाते व मोबाइल सिमकार्ड मुहैया कराने की बात कही। पुलिस ने उनसे बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, चैकबुक और मोबाइल सिमकार्ड बरामद किए। गहनता से पडताल में उनके बैंक खाते में बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन भी सामने आया।
रामगंज थाना पुलिस ने सजगता दिखाते हुए गिरोह की दूसरी लाइन तक पहुंच बनाई। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अपराध साबित करने की दिशा में कार्रवाई की। युवा शॉर्टकट से पैसा कमाने के लालच में नेटवर्क में फंसे, लेकिन उनका अपराध गंभीर है। बड़ी संख्या में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाकर उनकी जमा पूंजी हड़पने का काम किया है।
हर्षवर्धन अग्रवाला, एसपी अजमेर
Updated on:
28 Sept 2026 11:38 am
Published on:
28 Sept 2026 11:38 am
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