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Big issue: ये है हवाई घोषणा, कोर्स ना एडमिशन process का अता-पता

सत्र 2019-20 से कोर्स शुरू होगा या नहीं इसको लेकर सबकी निगाहें मंत्रालय पर टिकी हैं।
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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 10 May 2019, 6:32 AM IST

integrated b.ed course

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कॉलेज में चार साल के एकीकृत बीएड कोर्स के शुरुआत का इंतजार है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साल के बीएड को खत्म कर चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम लागू करने की योजना बनाई है। अब तक दाखिला प्रक्रिया तक नहीं हुई है। सत्र 2019-20 से कोर्स शुरू होगा या नहीं इसको लेकर सबकी निगाहें मंत्रालय पर टिकी हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश में चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग कार्यक्रम लागू करने की योजना बनाई है। केंद्र सरकार सत्र 2019-20 से इसकी शुरुआत करना चाहती है। विद्यार्थियों को बीए, बीएससी और बी.कॉम स्तर के नियमित कोर्स की तरह सभी कॉलेज में चार वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिले मिलेंगे।

तय नहीं दाखिलों का फार्मूला

चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम में दाखिलों का फार्मूला तय नहीं हुआ है। पिछले साल मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सत्र 2019-20 से कोर्स प्रारंभ करने की बात कही थी। बीएड कॉलेज में बारहवीं पास विद्यार्थियों को किस फार्मूले से प्रवेश मिलेंगे यह तय नहीं किया गया है। जबकि सामान्य कॉलेजों में बीए, बी.कॉम, बीएससी प्रथम वर्ष के कोर्स में विद्यार्थियों को सीधे दाखिले मिलते हैं।

यूं होते हैं दो वर्षीर्य बीएड कोर्स में प्रवेश
मौजूदा वक्त राजस्थान में करीब 950 से ज्यादा निजी और सरकारी बीएड कॉलेज हैं। इनमें दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीए/बीएससी बीएड कोर्स संचालित हैं। इन बीएड पाठ्यक्रमों में दाखिलों के लिए सरकार प्रतिवर्ष प्री.टीचर एज्यूकेशन टेस्ट का आयोजन करती है। पिछले 20 साल यही प्रक्रिया जारी है। प्री. बीएड परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अंकों और मेरिट के अनुरूप ऑनलाइन काउंसलिंग के आधार पर कॉलेज में प्रवेश मिलते हैं।

सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा....

सरकार बीएड कोर्स को एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की तरह बनाना चाहती है। मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में सेमेस्टर पद्धति लागू है। विद्यार्थियों को सेमेस्टर परीक्षाओं में देरी तो कभी परिणाम को लेकर परेशानियां उठानी पड़ती हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की डिग्री चार के बजाय पांच साल में पूरी होती है। उधर राजस्थान में दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीएससी/बीएड कोर्स में वार्षिक परीक्षा योजना लागू है। विद्यार्थी दो और चार साल की अवधि में कोर्स पूरा कर लेते हैं। लिहाजा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को बीएड में सेमेस्टर अथवा वार्षिक परीक्षा स्कीम लागू करने के लिए भी योजना बनानी होगी।