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अलवर में राजर्षि चौराहे का नाम बदलने पर विवाद, पुराना नाम बहाल करने की मांग 

अलवर में राजर्षि चौराहे (Rajarshi Chauraha) का नाम बदलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को छात्र नेता अभिषेक जायसवाल के नेतृत्व में छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने चौराहे का नाम ज्योति कलश (Jyoti Kalash) किए जाने का विरोध करते हुए पुराना नाम बहाल करने की मांग की।
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राजर्षि चौराहे का नाम बदलने पर छात्रों का विरोध (फोटो - पत्रिका)

अलवर के राजर्षि चौराहे (Rajarshi Chauraha) का नाम बदलकर ज्योति कलश (Jyoti Kalash) किए जाने को लेकर छात्रों ने विरोध जताया। गुरुवार को छात्र नेता अभिषेक जायसवाल के नेतृत्व में छात्र चौराहे पर पहुंचे और नाम परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि राजर्षि चौराहा (Rajarshi Chauraha) लंबे समय से राजर्षि महाविद्यालय (Raj Rishi College) से जुड़ी पहचान रखता है।

राजर्षि महाविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कॉलेज की स्थापना वर्ष 1930 में तत्कालीन अलवर शासक राजर्षि महाराजा जयसिंह ने उच्च शिक्षा के उद्देश्य से की थी। छात्रों का कहना है कि महाराजा जयसिंह ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण काम किया था। इसी ऐतिहासिक विरासत से जुड़े नाम को बदलने का वे विरोध कर रहे हैं।

अभिषेक जायसवाल ने दी आंदोलन की चेतावनी

छात्र नेता अभिषेक जायसवाल ने कहा कि राजर्षि चौराहा और महाविद्यालय किसी एक राजनीतिक दल की देन नहीं हैं। उनका कहना है कि महाराजा जयसिंह ने शिक्षा के लिए जो योगदान दिया, उसकी पहचान को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी और नाम परिवर्तन वापस नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

अभिषेक ने यह भी कहा कि चौराहा विद्यार्थियों से जुड़ा हुआ है और शहर में इसे विद्यार्थियों के लिए समर्पित स्थान के रूप में देखा जाता रहा है। प्रदर्शन के दौरान लक्षिता, अवनी तंवर, नितेश, अरुण, प्रेरणा, हेमंत, साहिल चौधरी, वैभव शर्मा और मनीष मीना सहित कई छात्र मौजूद रहे।

कांग्रेस नेताओं ने भी छात्रों का समर्थन किया

प्रदर्शन में कांग्रेस शहर अध्यक्ष अंकित गोयल और मनीष जैन भी मौजूद रहे। अंकित गोयल ने नाम परिवर्तन को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही नाम बदलने का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन छात्रों के साथ खड़ा होकर उनकी लड़ाई लड़ेगा।

चौराहे पर शिलालेख लगाने की मांग

छात्रों ने मांग की कि चौराहे का पुराना नाम राजर्षि चौराहा (Rajarshi Chauraha) ही रखा जाए। इसके साथ ही चौराहे पर एक शिलालेख (Inscription) लगाया जाए, जिसमें ‘राजर्षि’ शब्द का महत्व और महाराजा जयसिंह के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान का उल्लेख हो। छात्रों का कहना है कि इससे नई पीढ़ी को अलवर के इतिहास और शिक्षा से जुड़े इस योगदान की जानकारी मिल सकेगी। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर वन मंत्री संजय शर्मा ने सर्किल का बदलने की घोषणा की थी।