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सर्दी का मौसम शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। इसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले बस-ट्रकों को सड़क से हटाने के उद्देश्य से परिवर्तन योजना शुरू की थी। योजना के तहत नए और कम प्रदूषण वाले वाहनों को अपनाने के लिए वाहन मालिकों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, लेकिन अलवर और भिवाड़ी में इसका असर फिलहाल सीमित दिखाई दे रहा है।
अलवर में अब तक केवल 130 वाहनों ने परिवर्तन योजना के लिए पंजीयन कराया है, जबकि भिवाड़ी में यह संख्या महज 60 है। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 190 वाहनों का ही पंजीयन हुआ है। वहीं, राजस्थान के अलवर, भिवाड़ी और भरतपुर जिले एनसीआर के दायरे में आते हैं और यहां 7 हजार से अधिक वाहन इस योजना के दायरे में बताए जा रहे हैं।
मंत्रालय ने जुलाई में यह योजना शुरू की थी। योजना दिल्ली-एनसीआर के 37 जिलों में लागू की गई है। इसके तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। योजना के दायरे में आने वाले पंजीकृत बस-ट्रकों की संख्या 2,31,961 बताई गई है। ये वाहन कुल वाहनों का करीब तीन प्रतिशत हैं, लेकिन वायु प्रदूषण में इनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत बताई गई है।
परिवर्तन योजना के तहत बीएस-4 या इससे बेहतर वाहन खरीदने पर पांच साल तक लोन की ब्याज दर में पांच प्रतिशत की छूट का प्रावधान है। इसके अलावा बीएस-6 डीजल या सीएनजी वाहन खरीदने वालों को पांच साल तक हर महीने 1,200 से 4,800 रुपए तक के फ्यूल वाउचर दिए जाएंगे।
इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने पर वाहन की श्रेणी के अनुसार 64 हजार रुपए से लेकर 2.56 लाख रुपए तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इसके साथ ही करीब 10 साल तक मोटर व्हीकल टैक्स से छूट भी योजना का हिस्सा है।
दिल्ली सरकार ने एक नवंबर से बीएस-4 वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं देने का आदेश दिया है। ऐसे में एनसीआर क्षेत्र में चलने वाले पुराने वाहनों के मालिकों के सामने अपने वाहनों को बदलने या नई व्यवस्था अपनाने की चुनौती बढ़ सकती है। इसके बावजूद अलवर और भिवाड़ी में परिवर्तन योजना के तहत अभी तक बहुत कम पंजीयन होना चिंता का विषय है।
Updated on:
30 Sept 2026 12:32 pm
Published on:
30 Sept 2026 12:32 pm
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