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Success Story: दर्द को बनाया ताकत, पति के निधन के बाद अंजू बनीं तहसीलदार

Anju Jat Success Story: कुछ लोग मुश्किल हालातों के सामने टूट जाते हैं, तो कुछ उन्हीं परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लेते हैं। जिंदोली की बहू अंजू जाट की कहानी ऐसे ही हौसले की मिसाल है।
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अलवर

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Anil Prajapat

•

Oct 05, 2026

Anju Jat

अंजू जाट। पत्रिका फाइल फोटो

Tehsildar Success Story: अलवर। कुछ लोग मुश्किल हालातों के सामने टूट जाते हैं, तो कुछ उन्हीं परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लेते हैं। जिंदोली की बहू अंजू जाट की कहानी ऐसे ही हौसले की मिसाल है। पति को खोने के बाद जब जिंदगी में अंधेरा छा गया, तब उन्होंने उनके देखे सपने को अपना लक्ष्य बनाया और संघर्ष करते हुए तहसीलदार पद तक पहुंचकर नई मिसाल कायम की।

मुंडावर ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अजीजपुर की प्रधानाध्यापिका अंजू ने 28 सितंबर, 2018 को अध्यापिका के रूप में सेवा शुरू की। शादी के बाद घर और बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। वर्ष 2017 में मुख्य परीक्षा दी, लेकिन इंटरव्यू का अवसर नहीं मिला। इसके बाद शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल की और राजस्थान शिक्षा विभाग में सेवा देने लगीं। हालांकि प्रशासनिक सेवा में जाने की चाह उन्होंने कभी नहीं छोड़ी।

उनके पति हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। उनका सपना था कि अंजू एक दिन प्रशासनिक अधिकारी बनें। लेकिन वर्ष 2023 में सड़क दुर्घटना में पति के निधन ने अंजू की जिंदगी को झकझोर दिया। अचानक मिले इस दुख के बाद उनके लिए सामान्य जीवन में लौटना बेहद कठिन था। मगर परिवार, विद्यालय स्टाफ और दोस्तों ने उन्हें संभाला। पति की बातें और उनका सपना धीरे-धीरे उनके लिए हिम्मत बन गए।

शुरू की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

अंजू ने खुद को संभाला और फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की। इस दौरान उनके सास-ससुर फूली देवी और सेवानिवृत्त डिप्टी कमांडेंट राम कंवार ने उनका पूरा साथ दिया। बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग देकर उन्होंने अंजू को पढ़ाई के लिए समय दिया।

आखिरकार मेहनत सफल हुई और अंजू का चयन तहसीलदार पद पर हो गया। यह उपलब्धि उनके लिए केवल एक पद हासिल करना नहीं, बल्कि उस सपने को पूरा करना था जिसे उनके पति ने उनके लिए देखा था। उनकी कहानी महिलाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए संदेश है रास्ते मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन हौसला कायम हो तो मंजिल दूर नहीं रहती।