इस कानून के सुनवाई में वोटिंग करायी गयी थी, जिसमें नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थक तीन के मुकाबले दो मतों से हार गए। इस मामले में अजीत का वोट निर्णायक था क्योंकि इस कानून के खिलाफ तीसरा वोट इन्ही का था। और इसके परिणामस्वरुप नेट न्यूट्रैलिटी की गारंटी देने वाला कानून खत्म हो गया है। अब वहां लोगों को अलग-अलग वेबसाइट चलाने के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी होगी। साथ ही अब अमरीका में ऐसा हो सकता है कि वॉट्सएप चलाने के लिए 30 रुपये और ट्विटर के लिए 60 रुपये चुकाने पड़ेंगे।