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आखिर क्यों भारतीय मूल का ये शख्स बना अमरीका में इंटरनेट का विलेन?

अमरीका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के प्रमुख अजीत पई को बहुत से लोगों ने इंटरनेट की दुनिया का खलनायक घोषित कर दिया है
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Pradeep Kumar Pandey

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Updated: 18 Dec 2017, 3:17 PM IST

ajit pai

वाशिंगटन। अमरीका में नेट न्यूट्रैलिटी कानून खत्म होने के बाद के लोगो में इस फैसले को लेकर निराशा और नाराजगी देखने को मिल रही है। इस फैसले के बाद अमरीका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के प्रमुख अजीत पई को बहुत से लोगों ने इंटरनेट की दुनिया का खलनायक घोषित कर दिया है क्योंकि उनके ही निर्णायक वोट से अमरीका का नेट न्यूट्रैलिटी कानून खत्म हुआ है।

नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ अजीत ने किया था निर्णायक वोट

इस कानून के सुनवाई में वोटिंग करायी गयी थी, जिसमें नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थक तीन के मुकाबले दो मतों से हार गए। इस मामले में अजीत का वोट निर्णायक था क्योंकि इस कानून के खिलाफ तीसरा वोट इन्ही का था। और इसके परिणामस्वरुप नेट न्यूट्रैलिटी की गारंटी देने वाला कानून खत्म हो गया है। अब वहां लोगों को अलग-अलग वेबसाइट चलाने के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी होगी। साथ ही अब अमरीका में ऐसा हो सकता है कि वॉट्सएप चलाने के लिए 30 रुपये और ट्विटर के लिए 60 रुपये चुकाने पड़ेंगे।

फैसले के बाद अजीत हुए ट्रोल

इस फैसले के बाद दो हफ्ते पहले स्वीडन के एक व्यंगकार ने अजीत को लेकर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्हें द मोस्ट हेटेड पर्सन ऑन द इंटरनेट बताया गया था। यह वीडियो वायरल हो गया जिसे अभी तक तीस लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

ट्रंप ने किया था अजीत को नियुक्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी, 2017 में सत्ता संभालने के बाद अजीत पई की नियुक्ति की थी। हालांकि बराक ओबामा के कार्यकाल में भी अजीत खुलकर नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ बोलते आये हैं। भारतीय परिवार में पैदा हुए अजीत ने शिकागो यूनिवर्सिटी से कानून और हार्वर्ड से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है।

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल में यह कानून पास किय था जिसके चलते इस बात की गारंटी थी कि इंटरनेट पर हर वेबसाइट की रफ्तार और कीमत एक ही होगी। लेकिन कुछ दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने इस कानून को वापस ले लिया।

भारत में लागू होगा नेट न्यूट्रैलिटी

फैसले के बाद इसका असर भारत पर भी होने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि भारत में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने देश में नेट न्यूट्रैलिटी लागू करने का फैसला लिया है। यानी यहां हर वेबसाइट के लिए इंटरनेट की कीमत और रफ्तार एक जैसी ही होगी।