
ghazibada news। 30 साल पहले अपने परिवार से बिछड़ी एक महिला लोगों के घरों में काम करके दिन काट रही थी। लॉकडाउन ( lockdown )
में काम बंद हुआ ताे महिला के पास खाने के भी पैसे नहीं रहे। सड़क पर भूखे पेट घूम रही इस महिला काे गाजियाबाद पुलिस ( ghazibad police )
ने खाना खिलाया और 30 साल बाद बिछड़े परिवार से भी मिलवाया।
यह पूरा मामला गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके का है जहां पर 30 साल पहले भटकी हुई एक महिला को मोदीनगर पुलिस ने उसके बेटे से मिलाया तो दोनों के ही जज्बात आंसुओं में निकल पड़े। दोनों एक दूसरे से लिपट कर खूब रोए। बाद में दोनों ने गाजियाबाद ( माेदीनगर ) पुलिस को धन्यवाद कहा।
कोतवाली पुलिस ने 30 साल बाद बेटे को उसकी मां से मिला कर अपने फर्ज को दो कदम आगे बढ़ाने का काम किया है। लॉकडाउन में बेरोजगार होने के बाद काम की तलाश में महिला मेरठ से मोदीनगर पहुंची । महिला को अपने जिले का नाम याद था लेकिन गांव का नाम याद नहीं था। पुलिस कई घंटों की कोशिश के बाद महिला के परिजनों के संपर्क साध सकी।
इस सूचना पर महिला का बेटा रिश्तेदार के साथ थाने पहुंचा और मां को देखकर राे पड़ा। यह देख थाने में सभी पुलिसकर्मियों की भी खुशी से आंखें नम हो गई । इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि 30 साल पहले महिला पति से विवाद के बाद देवरिया छोड़ कर चुपचाप मेरठ पहुंच गई थी। वहां घरों में मेड का काम करने लगी थी। सप्ताह भर पहले यह महिला काम की तलाश में भटकती हुई महिला मोदीनगर थाने पहुंच गई।
इसी बीच थाना प्रभारी निरीक्षक की नजर उस महिला पर पड़ी तो उन्होंने महिला को खाना खिलाया और अकेले घूमने की वजह पूछी। इस दाैरान महिला काम मांगने की जिद पर अड़ी रही। काम नहीं मिलने की बात सुनते ही महिला रोने लगी। इसके बाद पुलिस ने इसके घर का पता मालूम किया। जिस पर महिला भावुक हो गई और महिला ने अपना नाम पार्वती बताया। इसके बाद महिला ने कोतवाल को आपबीती सुनाई ।
पार्वती ने बताया कि पति से विवाद होने के बाद करीब 30 साल पहले वह चुपचाप घर छोड़कर मेरठ आकर घरों में मेड का काम करने लगी थी। अब लॉक डाउन और कोरोना वायरस के चलते महिला को कोई काम नहीं दे रहा था। काफी प्रयास के बाद महिला अपने गांव का नाम नहीं बता पाई । इसके बाद कोतवाल ने इंटरनेट के माध्यम से देवरिया जनपद के सभी थानों के नाम खोज कर महिला को सुनाएं ।
इसमें खूखुद थाने का नाम सुनते ही महिला को कुछ याद आया उसके बाद उस थाना क्षेत्र के सभी गांव से लापता महिलाओं के नाम गिनाए गए। इस तरह काफी देर बाद महिला को अपने गांव बहसा का नाम याद आया। तब जाकर मोदीनगर पुलिस की सांस में सांस आई। इसके बाद थाना प्रभारी ने बहसा गांव के प्रधान का मोबाइल नंबर लेकर उन्हें इस मामले की जानकारी दी ।
ग्राम प्रधान संतोष सिंह ने महिला की पहचान थाना प्रभारी को बताई साथ ही प्रधान ने महिला के परिजनों को भी इसकी सूचना दी। पार्वती के परिजनों को यह सूचना मिली तो परिजनों ने महिला का फोटो व्हाट्सएप पर मंगवाया तो जिसे देखकर उन्हाेंने पार्वती को पहचान लिया गया। इसके बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।
दरअसल महिला के परिजन यह मान बैठे थे कि अब शायद ही पार्वती इस दुनिया में हाेगी। जब पार्वती के परिजनों को पूरी पहचान हो गई तो पार्वती का पुत्र रवीश कुमार अपने रिश्तेदार के साथ मोदीनगर थाने पहुंचा और मां के पैरों पर गिर कर रोने लगा। 30 साल बाद मिल रहे मां और बेटे के जज्बात आंसुओं के जरिए निकल आए। यह भावुक पल देखकर मोदीनगर थाने में माजूद सभी पुलिसकर्मी भी भावुक हाे गए।
पुलिस ने पूरी कागजी कार्यवाही के बाद महिला को परिवार के सुपुर्द कर दिया। परिवार से मिलने के बाद महिला व उसके परिवार वालो ने गाजियाबाद पुलिस का आभार व्यक्त किया है।