
Akshaya Tritiya puja vidhi
हिंदू कलैंडर के हिसाब से वैशाख शुक्ल की तृतीया को हर वर्ष अक्षय तृतीया मनाई जाती है। ऐसे में इस साल भी यानि 2021 में अक्षय तृतीया 14 मई Akshay tritya 2021 date यानि शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) को सनातन धर्म में एक अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। यानि इस दिन किसी भी श्रेष्ठ कर्म को करने के लिए मुहूर्त नहीं देखना होता।
पंडित एके पांडे के अनुसार अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2021) को लेकर अनेक पौराणिक कथाएं भी हैं। इन मुख्य मुख्य कथाओं के अनुसार एक ओर जहां त्रेता युग का आरंभ वैशाख शुक्ल तृतीया Vaisakh shukla tritiya को ही हुआ था, वहीं भगवान विष्णु के छठे अवतार यानि चिरंजीवी भगवान परशुराम जी का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था।
वहीं इसी दिन इसी दिन से बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं और और केवल इसी दिन वृन्दावन में भगवान बांके-बिहारी जी के चरणों के भी दर्शन होते हैं।
अक्षय तृतीया 2021 का शुभ मुहूर्त:
अक्षय तृतीया शुक्रवार 14 मई 2021
तृतीया तिथि शुरु: 14 मई 2021 सुबह 05:38 बजे से
तृतीया तिथि समाप्त: 15 मई 2021 सुबह 07:59 तक
अक्षय तृतीया 2021 पूजा का शुभ मुहूर्त :
सुबह 05:38 से दोपहर 12:18 तक
पूजा की कुल अवधि 6 घंटे 40 मिनट
अक्षय पात्र की कथा
वहीं इसके अलावा एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यह भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन महाभारत काल में द्रौपदी को सूर्य देव से एक अक्षय पात्र मिला था।
कहा जाता है एक बार महर्षि दुर्वासा ( Rishi durvasa ) अपने 10 साथियों के साथ वनवास काल के दौरान पांडवों से मिलने पहुंचे। जहां ऋर्षि दुर्वासा ने पांडवों से कहा कि हम स्नान करके भोजन करेंगे।
इस पर युधिष्ठिर ने द्रौपदी ( draupadi ) को बताया कि ऋषि दुर्वासा अपने 10 से अधिक शिष्यों के साथ अपने घर पधारे हैं। अभी वो स्नान करने गए है और आकर भोजन करेंगे। युधिष्ठिर की यह बात सुनकर द्रौपदी की चिंता बढ़ गई। परेशानी का कारण यह था कि सभी भोजन कर चुके थे और भोजन शेष नहीं था। ऐसे में उन्हें भय था कि यदि महर्षि दुर्वासा को भोजन ना करा पाए तो वह शाप दे देंगे।
कहा जाता है कि द्रौपदी को Suryadev से एक अक्षयपात्र मिला था। जिसमें तब तक अन्न रहता था जब तक की द्रौपदी भोजन ना कर लें। जैसे ही सबको खिलाने के बाद वे भोजन ग्रहण करतीं, वह पात्र पूरी तरह से खाली हो जाता था। महर्षि जब पधारे तब सभी पांडवों और पांचाली भोजन कर चुके थे।
ऐसे में द्रौपदी ने अपने परम सखा Shri krishna से उनकी लाज बचाने की विनती की। उन्होंने मुरलीधर को पुकारा और वे तुरंत हाजिर हो गए। उन्होंने अपनी पीड़ी श्रीकृष्ण को सुनाई।
कृष्ण जैसे ही द्रौपदी के पास पहुंचे उन्होंने कहा कि अत्यंत भूखा हूं, जल्दी से कुछ खाने को दो। इस पर द्रौपदी ने कहा कि मोहन इसीलिए तो तुम्हें पुकारा है। इसके बाद पूरी बात कह सुनाई। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि देखो तो पात्र में शायद कुछ शेष रह गया हो।
कृष्ण के बार-बार भोजन का आग्रह करने पर द्रौपदी ने उनके सामने वह अक्षयपात्र लाकर रख दिया। देवकीनंदन ने देखा कि उस पात्र में चावल का एक दाना शेष रह गया था।
उन्होंने जैसे ही उसे खाया उधर स्नान करके भोजन के लिए आ रहे महर्षि दुर्वासा और उनके शिष्यों का पेट भर गया। इस तरह से कृष्ण ने पांडवों और द्रौपदी को महर्षि दुर्वासा से मिलने वाले शाप से बचाया।
महर्षि दुर्वासा और उनके शिष्यों को जैसे ही यह अहसास हुआ कि उनका पेट तो काफी भरा हुआ है। वह तो अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं कर सकते।
तब उन्होंने आपस में पांडवों को बिना बताए ही प्रस्थान करने का निर्णय लिया। चूंकि महर्षि दुर्वासा जानते थे कि युधिष्ठिर धर्म प्रिय हैं वह अतिथि को बिना भोजन कराए जाने नहीं देंगे, ऐसे में वह पांडवों को बगैर बताए हुए अपने शिष्यों के साथ वहां से प्रस्थान कर गए।
माता लक्ष्मी की पूजा...
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस दिन धन-धान्य की देवी माता लक्ष्मी की Puja का भी खास विधान है। वहीं इस समय फैल रही कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) को देखते हुए इस बार घर में हर पूजा करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। इसके अलावा इस दिन किसी मदद चाहने वाले व्यक्ति को दान करना बहुत पुण्य फलदायी रहेगा।
पंडित एसके शुक्ल के अनुसार अक्षय तृतीया पर आप दान करके भी अक्षय फल पा सकते हैं। क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किया गया दान भी आपको अक्षय फल के रूप में वापस मिलता है। इस दिन नाम ही अक्षय होने के चलते इस दिन किए गए किसी भी पुण्य का कभी क्षय नही होता। वहीं इस दिन इस दिन किए गए किसी भी पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
Things to do an akshaya tritya day : ये करना चाहिए दान...
जानकारों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन Goddess lakshmi को प्रसन्न करने के भी कई उपाय हैं। ऐसे में इस दिन गुड़, बर्फी, सफेद वस्त्र, जल से भरा हुआ घड़ा, शक्कर, नमक, शरबत, चावल, चांदी का दान भी किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से जहां एक ओर अक्षय पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है वहीं महालक्ष्मी प्रसन्न भी होती हैं।
मान्यता के अनुसार इसी दिन दस महाविद्या में नवमी महाविद्या मातंगी देवी का प्रार्दुभाव हुआ था। वहीं इस दिन माता लक्ष्मी को खीर का भोग अवश्य लगाना चाहिए, साथ ही इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए।
अक्षय तृतीया वाले दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से भगावन विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करता है उसे मनचाहा फल मिलता है।
इसके अलावा इस दिन पितृदोष निवारण के लिए पितरों को तर्पण देना बहुत लाभदायक होता है। इस दिन किसी भी व्यक्ति जिसे मदद की जरूरत है उसे देवता व पितरों के नाम से जल, कुंभ akshaya tritya kalash, शक्कर, सत्तू, पंखा, छाता फलादि का दान करना बहुत शुभ फलदायी माना गया है।
अक्षय तृतीया 2021 के शुभ योग
इस बार अक्षय तृतीया पर बेहद शुभ योग बन रहे हैं। ऐसे में चंद्रमा व शुक्र दोनों के ही वृषभ राशि में रहने के कारण योग को समृद्धि देने वाला लक्ष्मी योग रहेगा। वहीं इस बार अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी नारायण योग और Gajkesri Yog भी बन रहे हैं।
लक्ष्मी नारायण योग रात 09:26 बजे से 10:45 बजे तक
गजकेसरी योग दोपहर 12 बजे से 01:45 बजे तक
वहीं इस दिन रोहिणी नक्षत्र रहने के अलावा शुभ योग Shubh Yog सुकर्मा और धृति योग का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में सुकर्मा योग जहां 14 मई रात 12 बजकर 15 मिनट से 01 बजकर 46 मिनट तक रहेगा वहीं इसके ठीक इसके बाद से धृति योग आरंभ हो जाएगा।
पितरों का तर्पण और ऐसे होते हैं समस्त पाप नष्ट...
जानकारों के अनुसार पुराणों के मुताबिक अक्षय तृतीया के दिन पितरों का तर्पण तथा पिन्डदान के साथ दान अक्षय फल प्रदान करना शुभ होता है। वहीं इस दिन गंगा स्नान करने से भगवत पूजन से समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त इस दिन किया गया तप हवन स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है, वहीं यदि ये तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान जप तप का फल भी अधिक बढ़ जाता है और इस बार इस दिन रोहिणी नक्षत्र ही रहेगा।
इन चीजों का दान माना जाता है उत्तम...
माना जाता है कि अक्षय तृतीया को किया गया पुण्य अक्षय रहता है। इस दिन कुछ खास चीजों का दान बेहद उत्तम माना गया है। जिनमें गौ, भूमि, सोना, घी, कपड़े, धान, गुड़, चांदी, नमक, शहद, मटकी, खरबूजा, खड़ाऊं और कन्या दान शामिल हैं।
वहीं ये भी मान्यता है कि विष्णुजी के नारायण, हयग्रीव व परशुराम अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही हुए थे। अक्षय तृतीया पर दान करना बहुत ही शुभ माना गया है।
ऐसे करें दान: ये होगी प्राप्ति...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार दान देते समय आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर और दान लेने वाले का मुंह उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इसके साथ ही अलग-अलग पदार्थों के दान से अलग-अलग फल मिलने की मान्यता है।
: वस्त्रों का दान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
: गुड़ का दान करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
: चांदी का दान करने से रूप और सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
: गाय को घास का दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
: दीपदान करने से नेत्र संबंधी रोग नहीं होते।
: मरीज को औषधि का दान करने से सुख की प्राप्ति होती है।
: लोहे का दान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
: तिल का दान करने से संतान की प्राप्ति होती है।
वहीं ये भी मान्यता है इस दिन जल का कोई पात्र यानी बरतन जैसे गिलास घड़ा का दान करना चाहिए। ग्रीष्मकाल में जल से जुड़ी शीतल चीजों का दान शास्त्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है।
इसके साथ ही अक्षय तृतीया पर अन्न दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसे में इस बार आप अपने आस-पास के किसी जरूरतमंद को चावल, आटा या कोई अन्य अनाज दान दे सकते हैं। ऐसा करने से मान्यता के अनुसार जहां आपकी समृद्धि में बढ़ौतरी होगी। वहीं अक्षय फल होने के कारण आपके घर में कभी धान्य की कमी नहीं होगी।
अक्षय तृतीया : पूजा विधि
जानकारों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा सुख समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए की जाती है। वहीं माता लक्ष्मी का खास दिन होने के कारण इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का भी विधान है।
इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में शीतल जल से स्नान आदि नित्य कर्मों व घर की साफ सफाई के बाद भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की प्रतिमा को स्नान कराकर साफ कपड़े से पोछकर पहले की तरह रख दें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को पूजा के दौरान सफेद फूल अर्पित करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के मंत्रों के जाप के साथ ही दान का भी संकल्प करें।
धूप बत्ती के साथ रोली व चन्दन का टीका लगाकर पान, अक्षत, मौली, पुष्पमाला और फूल चढ़ाएं। इसके बाद नैवेद्य का भोग तुलसी के पत्ते के साथ लगाएं। पूजन के बाद कथा को सुनें और आरती अवश्य उतारें।
इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दान दक्षिणा दें। इस दिन मां लक्ष्मी को गुलाबी पुष्प अवश्य चढ़ाएं साथ ही उन्हें एक स्फटिक की माला अर्पित करें। उसी माला से कम से कम 108 बार मंत्र का जाप करें। मंत्र -ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः।। फिर इस माला को अपने गले में धारण कर लें।
Published on:
13 May 2021 01:26 pm
