
SIT के रडार पर सैनिक सिक्योरिटी फर्म (फोटो- पत्रिका)
Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy Update:अयोध्या राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले की आंच अब वाराणसी तक पहुंच गई है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अब सैनिक सिक्योरिटी फर्म को अपने रडार पर लिया है। जांच में बैंक और सिक्योरिटी फर्म की बड़ी लापरवाही सामने आई थी, जिसके बाद SIT ने फर्म के मालिक और सुपरवाइजर से कड़ी पूछताछ की है।
सारनाथ स्थित सैनिक सिक्योरिटी फर्म के मालिक गौरव सिंह ने एसआईटी पूछताछ में बताया कि उनकी कंपनी 26 साल पुरानी है और उन्होंने कभी भी अयोध्या राम मंदिर में सीधे तौर पर कोई कर्मचारी नहीं भेजा है। उन्होंने दावा किया कि स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक ने उनकी फर्म से हाउस कीपिंग के काम के लिए कर्मचारी लिए थे। अब ये कर्मचारी राम मंदिर में दान की गिनती तक कैसे पहुंच गए इसका जवाब सिर्फ स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक ही दे सकते हैं।
जांच में सामने आया है कि ये सभी कर्मचारी मूल रूप से साफ-सफाई यानी हाउसकीपिंग के काम के लिए रखे गए थे। लेकिन बिना किसी पारदर्शी चयन-प्रक्रिया और सिर्फ सिफारिश के आधार पर इन्हें सीधे कैश गिनने जैसे बेहद संवेदनशील काम में लगा दिया गया। वहीं सिक्योरिटी एजेंसी के मालिक गौरव सिंह ने खुद को इस मामले से अलग करते हुए कहा है कि उनका करार सिर्फ एसबीआई से था और उन्होंने लोग केवल हाउसकीपिंग के लिए भेजे थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या स्थित नया घाट ब्रांच ने कैश गिनने के लिए 19 कर्मचारियों की मांग की थी। इसके बाद वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी ने लोगों को हायर करके बैंक को सौंप दिया। बाद में इन्हीं लोगों को राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में लगा दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी 19 कर्मचारी कथित रूप से मामले के मुख्य आरोपियों अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव के बेहद करीबी बताए जा रहे हैं।
एसआईटी की अब तक की छानबीन में एक बहुत बड़ी चूक का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि जिन कर्मचारियों को अयोध्या राम मंदिर के कोष की सुरक्षा और गिनती में लगाया गया था उनका कोई भी पुलिस वेरिफिकेशन या बैकग्राउंड सत्यापन नहीं किया गया था। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या शाखा ने दान की गिनती के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का ठेका इसी सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी को दिया था।
इस पूरे खेल का शक जनवरी महीने में ही हो गया था। हर महीने होने वाले ऑडिट में चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए ने बताया था कि चढ़ावे की राशि अचानक कम हो रही है और वाउचर का हिसाब नहीं मिल रहा है। सीए ने स्पष्ट किया था कि 5 लाख रुपये से ज्यादा के खर्चों का कोई सही हिसाब नहीं है। इसके बाद ट्रस्ट की तरफ से महासचिव चंपत राय को कई अहम सुझाव दिए गए थे। इनमें खातों की विस्तृत जांच कराने चढ़ावे के लिए अलग विभाग प्रमुख बनाने विदेशी मुद्रा के लिए अलग व्यवस्था करने और टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने जैसी बातें शामिल थीं।
बताया जा रहा है कि सुझावों वाले पत्र के बाद चंपत राय नाराज हो गए जिसके कारण जनवरी से मई तक कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका। जब मई महीने में चढ़ावे की रकम और ज्यादा गिर गई तो कलेक्शन सेंटर में चुपके से एक स्पाई कैमरा लगा दिया गया। इस कैमरे की भनक सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को ही थी। 24 घंटे की रिकॉर्डिंग में यह साफ दिखाई दिया कि गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी नोट अपनी जेब में रख रहे हैं। इसी खुफिया रिकॉर्डिंग के आधार पर 6 और 7 जून के बीच इस करोड़ों की चोरी का भंडाफोड़ हुआ।
जानकारी के मुताबिक सैनिक एजेंसी ने हाउस कीपिंग के नाम पर मंदिर ट्रस्ट को कुल 22 कर्मचारी दिए थे। इन्हीं में से कुछ कर्मचारियों को दान गिनने के काम में लगा दिया गया जो सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। फिलहाल एसआईटी ने इन 22 में से छह कर्मचारियों को पूरी तरह से अपने रडार पर ले लिया है। जांच टीम ने इन सभी संदिग्ध कर्मचारियों से सघन पूछताछ की है और अब इस पूरे प्रकरण में बैंक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।
Updated on:
02 Jul 2026 12:02 pm
Published on:
02 Jul 2026 11:50 am
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