
Malaria outbreak is increasing इस मानसून सीजन में अच्छी बारिश हुई है। बारिश के कारण वातावरण में नमी के साथ ही अब मलेरिया का डंक भी देखने को मिल रहा है। जिले में बीते जुलाई माह में ही मलेरिया के 123 मरीज मिल चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में इस बार मलेरिया का प्रकोप कितना है।
राहत भरी बात यह है जिले में मलेरिया से एक भी मौत नहीं हुई है। वहीं इस साल की बात करें तो जनवरी माह से अब तक जिले में मलेरिया के 171 मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा मलेरिया के मरीज डौंडी व डौंडीलोहारा ब्लॉक में मिले हैं। वहीं अब मलेरिया से बचाव के लिए नगरीय निकायों में दवाई का छिड़काव शुरू कर दिया गया है।
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विभाग के मुताबिक जनवरी माह से जून माह तक जिले में कुल 48 मलेरिया के मरीज थे पर जुलाई माह के 31 दिनों में ही 123 मरीज मिल गए। जुलाई माह में मलेरिया विभाग की टीम ने कुल 26 हजार 792 लोगों की आरडी व रक्तपट्टी से मलेरिया की जांच की थी मलेरिया के लगातार मिलते मरीजों को देखें तो जिले में बीते साल की तुलना में इस साल मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
सहायक नोडल अधिकारी डॉ. रमेश सोनबोइर ने बताया कि इस बार मलेरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए लोगों को अपने घरों की साफ-सफाई व आसपास गड्ढों में भरे पानी को निकाल दें या गड्ढों को मिट्टी से भर दें। मच्छरों से बचने अनिवार्य रुप से मच्छदानी का प्रयोग करें।
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जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में आने वाले लगभग हर दूसरे व्यक्ति की खून जांच की जा रही है क्योंकि इनमें से कई मलेरिया और टायफाइड से ग्रसित हैं। ऐसे में चिकित्सक पीडि़तों की खून जांच भी करवा रहे हैं। खून जांच कराने पैथोलॉजी लैब में मरीजों की भीड़ लग रही है। छोटे बच्चे सहित युवा, बुजुर्ग भी बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
0 ठंड लगना या पसीना आना
0 सिरदर्द
0 शरीर में दर्द
0 तनाव और थकान
0 उल्टियाँ और बेहोशी की अवस्था (गंभीर मामलों में)
0 खून की कमी (गंभीर मामलों में)
0 आंखों के पास खून की लाइन बनना
0 डायरिया
0 एनीमिया
0 कोमा में चले जाना
0 चक्कर आना
0 तेज से सांस लेना आदि।
0 अपने घर के आस-पास पानी जमा न होने दें।
0 पानी से भरे गड्ढ़ों में मिट्टी भर दें।
0 पानी के बर्तनों, टंकियों आदि को ढक कर रखें।
0 कूलर, पशु पक्षियों के बर्तन, इत्यादि को सप्ताह में एक बार अवश्य सुखाएं।
0 सोते समय कीटनाशक से उपचारित मच्छरदानी का उपयोग करें।
0 अगर कंपकंपी के साथ बुखार एवं बार-बार पसीना आए तो यह मलेरिया का बुखार हो सकता है।
0 ठहरे हुए पानी जैसे तालाब कुएं आदि में गम्बूजिया मछली डालें, यह मछली मलेरिया फैलाने वाले मच्छर के लार्वा को खा जाती है।
बदलते मौसम, बारिश का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में पालकों को छोटे बच्चों व वृद्ध लोगों पर खास ध्यान देने की जरूरत है। अच्छा रहेगा बासी भोजन, ठंडा पेय पदार्थ, ज्यादा तले भुने भोजन से परहेज करें। घर में गर्म पानी का सेवन सभी करें। अगर ज्यादा तकलीफ हो रही है तो तत्काल चिकित्सक व नजदीकी अस्पताल ले जाएं। वहीं लोगों को मच्छर से बचने घरों में मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके श्रीमाली ने बताया कि ओपीडी में सर्दी-खांसी, बुखार, डायरिया से पीडि़त ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। बच्चों के साथ आने वाले परिजनों से पूरी हिस्ट्री ली जाती है। डेंगू व मलेरिया की जांच अनिवार्य है।
Updated on:
10 Aug 2024 11:26 pm
Published on:
10 Aug 2024 11:26 pm
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