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ग्रामीणों के पसीने में इतनी ताकत थी कि बंजर जमीन पर भी उग आए फलदार पौधे

कहते हैं कि यदि सही सोच के साथ लगन और परिश्रम किया जाए तो पत्थर में भी फूल खिलाया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्राम पंचायत भेजा मैदानी के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने।
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बालोद

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Chandra Kishor Deshmukh

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Updated: 5 Aug 2018, 9:00 AM IST

बंजर जमीन पर लहलहाते फलदार पेड़

ग्रामीणों के पसीने में इतनी ताकत थी कि बंजर जमीन पर भी उग आए फलदार पौधे

बालोद/गुरुर. कहते हैं कि यदि सही सोच के साथ लगन और परिश्रम किया जाए तो पत्थर में भी फूल खिलाया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्राम पंचायत भेजा मैदानी के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने। तहसील मुख्यालय से 5 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत भेजा भैदानी में सरपंच, पंच और ग्रामीणों की सामूहिक मेहनत से लगाए गए पौधे अब पेड़ का रूप ले चुके हैं।

2017 में ढाई एकड़ बंजर भूमि पर किया पौधारोपण
ग्राम पंचायत भेजामैदानी मे मनरेगा के तहत सितंबर 2017 में ढाई एकड़ बंजर भूमि पर पौधारोपण किया गया था, जहां फल, फूल व सब्जी लगाया गया था। पौधरोपण के लिए जिस जमीन का चयन किया गया था, वह बंजर एवं दीमकयुक्त थी, जहां पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना असंभव था, लेकिन पंचायत ने इस चुनौती को स्वीकर करते हुए ढाई एकड़ जमीन पर आम, जाम, आंवला, करौंदा, वट, कटहल, चीकू सहित 45 प्रजाति के फलदार पौधों का रोपण किया गया, जो कि अब पेड़ों का रूप ले चुके हैं।

मिला जनप्रतिनिधियों का साथ
ग्राम पंचायत भेजा मैदानी में पौधारोपण में ग्रामीणों के साथ सरपंच कविता यादव, उपसरपंच जाकिर मोहम्मद, सचिव पन्नालाल सिन्हा सहित पंचगण कृष्णमुरारी यादव, देवप्रसाद यादव, राजकुमार नेताम, खेमलाल साहू, शेष धु्रव, राकेश यादव, ज्योति ठाकुर, कीर्ति साहू, प्रमलता साहू, रुखमणी, मीना निषाद, फुलू बाई, बारो बाई ने पौधारोपण में अपनी भूमिका निभाई।

सिंचाई की समस्या को देखते हुए ऐसे की सिंचाई की व्यवस्था
जिस स्थान पर पौधे लगाए गए हैं, उस स्थान पर पानी की सुविधा नहीं थी। पौधारोपण के पश्चात सिंचाई की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने तालाब के पानी से पौधों की सिंचाई की। इसके लिए ग्रामीणों ने अपनी कंधों में कांवर और साइकिलों के माध्यम से पानी उद्यान तक पहुंचाया। उद्यान के अंदर वट चबूतरे का निर्माण किया गया है, जिससे आने वाले राहगीर वहां बैठकर दो पल के लिए आराम कर सके।

IMAGE CREDIT: balod patrika

लोगों को आकर्षित करता है उद्यान
पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की मेहनत ने अब रंग लाना प्रारंभ कर दिया। उद्यान के प्रवेश द्वार को आकर्षण ढंग से सजाया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों का रोपण किया गया है, साथ ही मुख्य द्वार की दीवारों में राष्ट्रीय पशु बाघ व राजकीय पशु वनभैंसा का चित्र अंकित किया गया है, जो आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

बंजर सोच को पहले बदल
पंच रामकुमार नेताम व कृष्णमुरारी यादव ने कहा जिस स्थान पर उद्यान तैयार किया गया है वह स्थान बंजर भूमि था, पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी, लेकिन ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयास से बंजर भूमि पर उद्यान तैयार किया और आय के साधन बनाया। उन्होंने कहा जमीन बंजर नहीं है, बंजर तो हमारी सोच थी। सबसे पहले हमने अपनी सोच में परिवर्तन किया और परिश्रम किया, जिसका परिणाम हमारे सामने है।

पेड़-पौधे हमारे जीवन का अंग
ग्रामीण मेघूराम ने बताया पंचायत ने जब निर्णय लेकर पौधारोपण कर नर्सरी तैयार किया, तब हम लोगों ने भी समर्थन और सहयोग किया। पेड़-पौधा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है, जिसके बिना हम नहीं रह सकते। पंचायत ने सोचा वह कर दिखाया है।

लोगों को करती है प्रेरित
ग्रामीण गौतम ठाकुर ने कहा पंचायत ने जो कार्य किया है वह सराहनीय कार्य है, क्योंकि जहां पौधारोपण कर उद्यान बनाया गया है वह जमीन बंजर एवं दीमक से भरा पड़ा था, आज वहां फलदार वृक्ष नजर आ रहे हैं। यह जो स्थिति आज निर्मित हुई है, वह अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रही है।