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बरेली लोकसभा- इस सीट पर नहीं खुला सपा-बसपा का खाता

भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जानी वाली बरेली लोकसभा सीट 2009 के चुनाव में उसके हाथ से निकल गई थी लेकिन 2014 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया।
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बरेली

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suchita mishra

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Updated: 7 Oct 2018, 5:45 PM IST

loksabha election 2019

बरेली लोकसभा- इस सीट पर नहीं खुला सपा-बसपा का खाता

बरेली। चुनाव आयोग ने मध्य्प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। लोकसभा चुनाव के पहले विधानसभा के इन चुनावों का महत्त्व बहुत बढ़ गया है क्योकि इन राज्यों के चुनाव परिणाम 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में भी प्रभाव डालेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने मोदी लहर में बड़ी जीत दर्ज की थी और लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीट में से 73 सीटों पर कब्जा जमाया था। जिसमे 71 सीट भाजपा ने तो दो सीट अपना दल ने जीती थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बरेली लोकसभा सीट पर भी कब्जा जमाया था। भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जानी वाली बरेली लोकसभा सीट 2009 के चुनाव में उसके हाथ से निकल गई थी लेकिन 2014 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया।

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विधानसभा में भी जोरदरा प्रदर्शन

लोकसभा चुनाव की तरह ही भाजपा ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जोरदार प्रदर्शन करते हुए बरेली लोकसभा क्षेत्र की सभी पांच विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था। बरेली की शहर विधानसभा सीट से डॉक्टर अरुण कुमार, कैंट से राजेश अग्रवाल, मीरगंज से डीसी वर्मा, भोजीपुरा से बहोरनलाल मौर्य और नवाबगंज से केसर सिंह चुनाव जीत कर विधायक बने।

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भाजपा का गढ़ है बरेली

बरेली लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ है और इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के संतोष गंगवार ने सात बार जीत दर्ज की है। दो बार ये सीट जनसंघ के खाते में गई है। पांच बार बरेली लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई है जबकि एक बार भारतीय लोकदल ने इस सीट पर कब्जा जमाया है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी बरेली लोकसभा सीट पर एक बार भी कब्जा नहीं जमा पाई है।

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महागठबंधन का प्रभाव नहीं

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में महागठबंधन की बात हो रही है। महागठबंधन में मुख्य रूप से सपा,बसपा और कांग्रेस के शामिल होने की सम्भावना है। अगर बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव की तो इस चुनाव में भजपा के संतोष गंगवार ने इन तीनों पार्टियों से ज्यादा वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। मोदी लहर में संतोष गंगवार को 5,18,258 वोट मिले जबकि दूसरे नम्बर पर रही सपा की आयशा इस्लाम को 2,77,573 वोट ही हासिल हुए और संतोष गंगवार ने 2,40,685 वोटों से जीत हासिल की इस चुनाव में बसपा के उमेश गौतम को 106049 और कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन को 84213 वोट ही हासिल हुए। इस चुनाव में संतोष गंगवार को 2009 के चुनाव की तुलना में 20.91 प्रतिशत ज्यादा वोट प्राप्त हुए और उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस के कुल वोटो से ज्यादा वोट मिले।

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