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बॉर्डर पर भारत की बड़ी तैयारी: राजस्थान में सीमा से सटकर बनेगी 225 KM लंबी डामर सड़क, जानिए इसके पीछे की मुख्य वजह

राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बाखासर रण से जैसलमेर के तनोट तक तारबंदी के समानांतर करीब 225 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई जा रही है। जानिए इसके पीछे की मुख्य वजह-
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बाड़मेर

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Santosh Trivedi

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भवानीसिंह राठौड़

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Oct 12, 2026

rajasthan india pak border road project

India Pakistan border road project Rajasthan. Photo- Google Gemini

भवानीसिंह राठौड़/बाड़मेर। भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बाखासर रण से जैसलमेर के तनोट तक तारबंदी के समानांतर करीब 225 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई जा रही है।

रेतीले धोरों और दुर्गम रास्तों के बीच बनने वाली इस सड़क से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को गश्त में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अभी तक तारबंदी के पास कई हिस्सों में जवानों को कच्चे और रेतीले रास्तों से पेट्रोलिंग करनी पड़ती है। धूल और दुर्गम भूभाग के कारण आवाजाही में परेशानी होती है।

डामर सड़क बनने से सीमावर्ती चौकियों तक पहुंचना और नियमित गश्त करना आसान होगा। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने परियोजना के लिए तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए है। करीब 260 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के तहत मुनाबाव के पास निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यहां करीब 25 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है ।

सीमावर्ती गांवों तक पहुंच भी होगी आसान

बाखासर, मुनाबाव और तनोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुरक्षा के साथ स्थानीय जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर आधारभूत ढांचे से निर्माण, रखरखाव और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्यों में सहूलियत मिल सकती है।

राजस्थान की पाकिस्तान से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा करीब 1.070 किलोमीटर लंबी है। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर प्रमुख सीमावर्ती जिले हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सामरिक सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

प्रदेश का बड़ा सीमावर्ती हिस्सा थार के रेगिस्तान में आता है। दूर-दूर तक फैले रेतीले इलाके, विरल आबादी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सीमा सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

ऐसे में तारबंदी के समानांतर सड़क निर्माण सामरिक दृष्टि से अहम है। बेहतर संपर्क से निगरानी व्यवस्था को मजबूत होगी। संदिग्ध तथा तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयासों को भी इससे सहारा मिलने की उम्मीद है।

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