सुवा नृत्य को तोता नृत्य भी कहा जाता है। दरअसल, ‘सुआ’ का अर्थ तोता होता है। लोकमान्यता के अनुसार, तोता मनुष्य की बोली की नकल करने में सक्षम होता है। इसी प्रतीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने मन के भाव, सुख-दुख, प्रेम, मायके की स्मृतियां और विरह की पीड़ा गीतों में पिरोकर अभिव्यक्त करती हैं। इस तरह सुआ गीत महिलाओं की भावनाओं को स्वर देने का सशक्त लोक माध्यम बनते हैं।