
स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (Photo Patrika)
CSVTU Students: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) के शिक्षण विभागों (UTD) में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के शोध, प्रोजेक्ट और नवाचार को अब आर्थिक मदद मिल सकेगी। विश्वविद्यालय ने संचयी व्यावसायिक विकास भत्ता यानी सीपीडीए (CPDA) की नई नियमावली जारी की है। इसके तहत पात्र नियमित शिक्षकों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 75 हजार रुपए तक की राशि मिलेगी।
इस राशि का उपयोग विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और शोध से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी किया जा सकेगा। नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री, प्रयोग और अन्य स्वीकृत शैक्षणिक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सीपीडीए की राशि का इस्तेमाल केवल शिक्षक के व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके मार्गदर्शन में चल रहे विद्यार्थियों के शोध और नवाचार कार्यों के लिए भी किया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था के अनुसार सीपीडीए का संचालन तीन साल के ब्लॉक में किया जाएगा। यदि किसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत 75 हजार रुपए की पूरी राशि खर्च नहीं हो पाती है तो शेष राशि को उसी ब्लॉक के अगले वर्षों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए नियमावली में निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित सक्षम अधिकारी से स्वीकृति लेना जरूरी होगा। इस प्रावधान से उन शिक्षकों और विद्यार्थियों को फायदा होगा, जिनके प्रोजेक्ट या शोध कार्यों में खर्च अलग-अलग चरणों में होता है। राशि को निर्धारित अवधि में जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने की सुविधा मिलने से शोध गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सीपीडीए के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट से जुड़ी जरूरी सामग्री और संसाधनों पर राशि खर्च की जा सकेगी। शिक्षक के मार्गदर्शन में चल रहे प्रोजेक्ट में प्रयोग के लिए आवश्यक सामग्री, उपकरण अथवा अन्य स्वीकृत शैक्षणिक जरूरत होने पर इस मद से सहायता ली जा सकेगी। हालांकि राशि के इस्तेमाल के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बाद ही खर्च किया जा सकेगा।
नई नियमावली में सीपीडीए राशि के उपयोग का दायरा केवल विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका इस्तेमाल शोध-पत्र प्रकाशन, शोध संबंधी सेवाओं, पेशेवर प्रशिक्षण, किताबों, रिसर्च जर्नल और डिजिटल संसाधनों के लिए भी किया जा सकेगा। इससे शिक्षकों को शोध कार्यों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध होंगे और उनके मार्गदर्शन में काम कर रहे विद्यार्थियों को भी शोध सामग्री तथा तकनीकी संसाधनों का लाभ मिल सकेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि सीपीडीए की नई व्यवस्था से नियमित शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों के शोध और नवाचार कार्यों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। प्रोजेक्ट तैयार करने में लगने वाली सामग्री से लेकर शोध प्रकाशन और अन्य स्वीकृत जरूरतों के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को अपने तकनीकी विचारों को प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है। CSVTU के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने कहा कि नियमित शिक्षकों और विद्यार्थियों के शोध एवं नवाचार को इससे प्रोत्साहन मिलेगा। वे नई खोज कर सकेंगे और प्रोजेक्ट में लगने वाली सामग्री समेत अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में भी इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
Updated on:
08 Oct 2026 12:20 pm
Published on:
08 Oct 2026 12:20 pm
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