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Controversy in University: सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति ने कुलसचिव की योग्यता पर उठाए सवाल तो कहा- वे खुद कुलपति पद के लायक नहीं

Sant Gahira Guru Vishwavidyalala Surguja: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा में दो उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों ने एक-दूसरे की योग्यता पर उठाए सवाल, इन दिनों चल रही दोनों के बीच खींचतान
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Sand Gahira Guru Vishwavidyalaya Surguja

Controversy in University, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा (Photo- Patrika)

अंबिकापुर. संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (Sant Gahira Guru Vishwavidyalaya Surguja) में कुलपति व कुलसचिव के बीच काफी खींचतान चल रही है। आपसी विवाद विश्वविद्यालय के कार्यों को प्रभावित कर रहा है। कुलपति ने कुलसचिव की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए शासन को पत्र लिखा है। वहीं नियमित कुलसचिव की पदस्थापना को लेकर राज्यपाल एवं कुलाधिपति की मंजूरी का उल्लेख होने के बावजूद आदेश जारी नहीं होने पर राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग को दोबारा पत्र भेजा है। पत्र में डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का आदेश तत्काल जारी करने कहा गया है। वहीं कुलसचिव ने भी कहा है कि कुलपति खुद पद के लायक नहीं हैं।

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति राजेन्द्र लाकपाले की ओर से 18 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए संबंधित दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के कुल सचिव के वेतनमान के अनुरूप शारदा प्रसाद त्रिपाठी नहीं हैं। इन्हें रजिस्ट्रार का काम भी नहीं आता है।

इधर कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने कुलसचिव (University Registrar) पद से जुड़े घटनाक्रम और विश्वविद्यालय में चल रही प्रशासनिक स्थिति को लेकर स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि मामला केवल पदस्थापना के आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज और पद की स्थिति को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।

कुलपति ने नियमों को ताक पर रख की खरीदी

कुलसचिव ने कहा कि मेरी नियुक्ति शासन के नियमों व अनुमोदन के पश्चात हुई है। इसमें कोई शंका नहीं है। कुलपति 2-3 माह से दबाव बना रहे हैं, अपने अनुसार मनमानीपूर्वक काम कराना चाहते हैं। मैं ऐसा नहीं कर सकता। विवि में खरीदी की बात करें तो उसकी भी प्रक्रिया होती है।

डिमांड स्टोर से आता हैं, मैं फाइनेंस को देता हूं इसके बाद कुलपति की प्रशासनिक स्वीकृति के बाद पोर्टल के माध्यम से खरीदी होती है। लेकिन कुलपति ने इन सारे नियमों को ताक पर रखकर कई चीजों की खरीदी कर ली है और भुगतान करने के लिए बोल रहे हैं, जबकि क्रय की प्रक्रिया हुई ही नहीं तो भुगतान कैसे किया जाए।

VC and Registrar dispute: भर्ती में गड़बड़ी का भी लगाया आरोप

कुलसचिव ने आरोप लगाया कि छात्रों की विभिन्न विषय की पढ़ाई के लिए स्ववित्तीय योजना से प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाती है। नियम व आवश्यकता के तहत 7 प्रोफेसरों का रिन्यूअल अपै्रल-मई में हुआ था। इसलिए कुलपति ने 8वें प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस के लिए मनीषा देवांगन की नियुक्ति कर ली है। न तो इसके लिए विज्ञापन जारी हुआ और न ही स्ववित्तीय योजना समिति की बैठक हुई।

जबकि कंप्यूटर साइंस के लिए नियमित प्रोफेसर की भर्ती हो गई है। इसके बाद यह पद स्ववित्तीय से हटा दिया गया है। ऐसे में मनमाने तरीके से नियुक्त मनीषा देवांगन को वेतन कहां से दिया जाएगा। इनका वेतन रूका हुआ है। इस तरह की कई मनमानी कुलपति कर रहे हैं और उसमें साथ देने के लिए कह रहे हैं।

कलसचिव नहीं हैं योग्य

कुलपति राजेंद्र लाकपाले (Vice Chancellor Rajendra Lakpale) का कहना है कि कुलसचिव के पद के लायक शारदा प्रसाद त्रिपाठी की योग्यता नहीं हैं। रजिस्ट्रार का काम भी नहीं आता है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा था। राजभवन ने भी शासन को अनुशंसा की है। उनके स्थान पर अनुभवी व योग्य व्यक्ति को कुलसचिव रखा जाए।

कुलपति भी अपने पद के लायक नहीं

वहीं कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि मुझे अफसोस है कि मैं ऐसे नेतृत्व के साथ काम कर रहा हूं। कुलपति दबाव बनाकर काम करा रहे हैं। खुद वे कुलपति के लायक नहीं है। मेरी नियुक्ति शासन के नियमों व अनुमोदन के पश्चात हुई है।

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