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भिलाई में दिवाली के साथ चढ़ा चुनावी रंग, वार्डों में सक्रिय हुए संभावित प्रत्याशी, ऐसे साध रहे समीकरण

Bhilai Corporation Election: दीपावली के साथ ही भिलाई में नगर निगम चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। टिकट की दावेदारी से पहले संभावित प्रत्याशी घर-घर पहुंचकर मिठाई और दीये बांट रहे हैं।
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भिलाई

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Khyati Parihar

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Updated: 3 Nov 2026, 11:42 AM IST

Chhattisgarh News

घर-घर मिठाई और दीये बांट रहे दावेदार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bhilai Municipal Election: दीपावली के उल्लास के बीच भिलाई की फिजां में चुनावी रंग पूरी तरह घुल चुका है। बाजारों में त्योहार की रौनक के साथ नगर निगम चुनाव की तैयारी में जुटे पार्षद पद के संभावित दावेदार भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। त्योहार की मिठास के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने की होड़ मची है। चुनाव की औपचारिक तारीखों और आचार संहिता की घोषणा से पहले ही दावेदार मतदाताओं के घर-घर दस्तक देकर मिठाई के डिब्बे, मिट्टी के दीये, कैलेंडर और पूजन सामग्री भेंट कर रहे हैं। इसके बहाने लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर अपने पक्ष में माहौल तैयार किया जा रहा है।

70 वार्डों में 70 फीसद ने शुरू किया जनसंपर्क

भिलाई नगर निगम के 70 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर करीब 70 फीसद दावेदारों ने मैदानी मोर्चा संभाल लिया है। इनमें प्रमुख दलों से टिकट की आस लगाए वरिष्ठ नेताओं के अलावा युवा और निर्दलीय लडऩे की तैयारी कर रहे स्थानीय चेहरे भी शामिल हैं। टिकट वितरण भले ही अभी दूर हो, लेकिन पार्टी आलाकमान की नजरों में खुद को मजबूत दिखाने के लिए वार्ड स्तर पर शक्ति प्रदर्शन और जनसंपर्क तेज कर दिया गया है। कई वार्डों में कार्यकर्ताओं को लामबंद रखने के लिए मेल-मुलाकात और दावतों का दौर भी शुरू हो चुका है।

वादों के साथ बनाई जा रही जमीन

घर-घर पहुंच रहे दावेदार सिर्फ बधाई तक सीमित नहीं हैं; वे वार्ड की सफाई, बदहाल सडक़ों, पेयजल किल्लत और नालियों की समस्याओं को उठाकर स्थानीय असंतोष को भी हवा दे रहे हैं। अब देखना होगा कि त्योहार के बहाने बांटी गई यह मिठास आगामी निकाय चुनाव में किसे जीत का स्वाद चखाती है।

आचार संहिता से पहले खर्च की खुली छूट

राजनीतिक हलकों में इसे त्योहार की शुभकामनाओं से ज्यादा भविष्य का चुनावी निवेश माना जा रहा है। चूंकि अभी आचार संहिता लागू नहीं हुई है और चुनाव आयोग के खर्च की निगरानी शुरू नहीं हुई है, इसलिए दावेदार दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं। बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने और युवाओं को साधने के लिए त्योहार को सबसे मुफीद अवसर बनाया गया है।