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Rajasthan Sarpanch Election: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी के चुनाव में हंगामा, फ़र्ज़ी वोटिंग के आरोप पर पुलिस से तीखी बहस

Pawan Sahu Voting Controversy: राजस्थान पंचायत चुनाव में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू का बड़ा हंगामा। फुलियाखुर्द में फर्जी मतदान का लगाया आरोप, पुलिस ने मतदान केंद्र से बाहर निकाला।
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भीलवाड़ा

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Nakul Devarshi

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Updated: 30 Oct 2026, 3:09 PM IST

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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू ने पकड़ी फ़र्ज़ी वोटिंग!

राजस्थान के पंचायती राज चुनावों के दौरान भीलवाड़ा के शाहपुरा जिले की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत का मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। जाने-माने फिटनेस यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल तेली (साहू) इस सीट से सरपंच पद की चुनावी मैदान में उतरी हैं। मतदान के दिन फुलियाखुर्द के एक मतदान केंद्र पर उस समय अचानक भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब पवन साहू ने बूथ के भीतर जारी मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए फर्जी वोटिंग होने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने जब उनकी आपत्तियों को अनसुना कर दिया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया स्टार पवन साहू को मतदान केंद्र से बाहर खदेड़ दिया, जिसके बाद कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

करोड़ों फॉलोअर्स वाले फिटनेस क्रिएटर की जमीनी सियासत में एंट्री

पवन साहू का नाम देश के शीर्ष फिटनेस यूट्यूबर्स और इंस्टाग्राम क्रिएटर्स में शुमार किया जाता है, जिनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों की संख्या में फॉलोअर्स हैं। फुलियाखुर्द पंचायत चुनाव में उनकी एंट्री ने एक साधारण से ग्रामीण चुनाव को राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में ला दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से पवन साहू ने अपनी पत्नी के पक्ष में घर-घर जाकर बेहद आक्रामक चुनाव प्रचार किया था। उनके चुनाव प्रचार के वीडियोज़ को सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों व्यूज मिले, जिससे यह ग्रामीण चुनाव पूरी तरह से हाई-प्रोफाइल बन गया।

पवन साहू के सोशल मीडिया यूज़र्स 

यूट्यूब पर 27 मिलियन सब्सक्राइबर 

फेसबुक पर 3 मिलियन फ़ॉलोअर्स 

इंस्टाग्राम पर 7 मिलियन फ़ॉलोअर्स 

चर्चा और विवाद के बीच दो ध्रुवों में बंटी ग्रामीण जनता

पवन साहू के इस राजनीतिक मैदान में उतरने और उनके चुनाव लड़ने के तौर-तरीकों को लेकर स्थानीय स्तर पर दो अलग-अलग तरह की चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

उनके समर्थकों का मानना है कि पवन साहू के पास नाम, शोहरत और पैसे की कोई कमी नहीं है। वे अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर केवल अपने पैतृक क्षेत्र के विकास, खराब सड़कों की दशा सुधारने, पेयजल संकट दूर करने और सरकारी स्कूलों का कायापलट करने के उद्देश्य से राजनीति में आए हैं। समर्थकों का तर्क है कि उनके प्रभाव से इस पिछड़े ग्रामीण इलाके को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बड़ा प्रशासनिक बजट मिल सकेगा।

दूसरी तरफ, चुनावी मैदान में डटे अन्य प्रत्याशियों और आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया से भारी-भरकम कमाई करने वाले पवन साहू केवल अपनी लोकप्रियता और डिजिटल दबदबे का फायदा उठाकर स्थानीय राजनीति पर कब्जा जमाना चाहते हैं। विरोधियों का यह भी सवाल है कि क्या एक बड़ा सोशल इन्फ्लुएंसर चुनाव जीतने के बाद गांव में स्थाई रूप से रहकर आम जनता की सेवा कर पाएगा या नहीं।

फिलहाल, मतदान केंद्र पर हुए इस हंगामे और पुलिस कार्रवाई के बाद फुलियाखुर्द पंचायत में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है, और हर किसी की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले के चुनावी नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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