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ये क्या? शनिदेव को लाना था यमराज को उठा लाई पुलिस, बन गई किरकिरी की वजह

इस बार पुलिस के सुर्खियों में आने की वजह शनिदेव और यमराज है। कमाल ये है कि, उन्हें ये ही नहीं पता कि, कौन शनि हैं और कौन यम?
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भिंड

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Mohammad Faiz Mubarak

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Updated: 6 Feb 2022, 7:28 PM IST

News

ये क्या? शनिदेव को लाना था यमराज को उठा लाई पुलिस, बन गई किरकिरी की वजह

भिंड. मध्य प्रदेश की भिंड पुलिस का एक कारनामा शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने कामों को लेकर अकसर सुरिखियों में रहने वाली भिंड पुलिस एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार उनके सुर्खियों में आने की वजह शनिदेव और यमराज हैं। कमाल ये है कि, उन्हें ये ही नहीं पता कि, कौन शनि हैं और कौन यम। दरअसल, पिछले दिनों शहर के शनि मंदिर से चोर शनिदेव की मूर्ति चुराकर ले गए थे। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने इसकी शिकायत लहार पुलिस को दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक मूर्ति जब्त कर मंदिर ट्रस्ट को देनी चाही तो मंदिर ट्रस्ट ने उस मूर्ति को लेने से इंकार कर दिया। क्योंकि, पुलिस जो मूर्ति जब्त करके लाई थी, शनिदेव की नहीं बल्कि यमराज की थी।


पुलिस जब शनि मंदिर में चोरी गई मूर्ति लौटाने पहुंची मंदिर ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि, ये वो मूर्ति है ही नहीं जो चोरी गई थी, क्योंकि चोरी जाने वाली मूर्ति शनिदेव की थी, जबकि, आप जो मूर्ति लौटाने आए हैं वो यमराज की है। फिलहाल, मंदिर ट्रस्ट द्वारा मूर्ति लेने से इंकार करने के बाद अब पुलिस यमराज को थाने ले आई है और यहां के मालखाने में मूर्ति रख दी गई है।

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शहरभर में हो रही पुलिस की किरकिरी

बता दें कि, मामला शहर के लहार थाने के अंतर्गत आने वाले भाटनताल स्थित नवग्रह मंदिर का है। यहां गुजरे 21 जनवरी की रात चोर शनिदेव की मूर्ति उखाड़कर ले गए थे। वारदात के बाद मंदिर ट्रस्ट की ओर से इसकी शिकायत थाने में की थी। पुलिस एक मूर्ति बरामद कर उसे मंदि ट्रस्ट को लौटाने पहुंची, लेकिन मूर्ति शनिदेव की न होकर यमराज की है। फिलहाल, पुलिस द्वारा मूर्ति की पहचान को लेकर इस तरह का अंजान रवैय्या सामने आने के बाद अब शहरभर में पुलिस की किरकिरी हो रही है।


SDOP और मंदिर ट्रस्ट के बीच हुई बैठक

जानकारी तो यहां तक सामने आई है कि, पुलिस की किरकिरी छुपाने के लिए लहार SDOP अवनीश बंसल ने मंदिर ट्रस्ट के साथ एक बैठक भी की, जिसमें उन्होंने मूर्ति रख लेने की बात कही ताकि, शहर में हो रही किरकिरी को खत्म किया जा सके। लेकिन, मंदिर प्रबंधन की ओर से किसी भी शर्त पर मूर्ति लेने से इंकार कर दिया।

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धार्मिक ग्रंथ में नहीं इस बात का उल्लेख

दरअसल, पुलिस द्वारा मूर्ति लौटाने के समय मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को इस मूर्ति की पहचान के लिए बुलाया गया था। उनके द्वारा ही पहचान किये जाने के बाद इसे यमराज की मूर्ति बताकर लेने से इंकार कर दिया। बताया जाता है कि उन्होंने पुलिस से कहा कि मूर्ति के एक हाथ में दंड और दूसरे में पांस है और इसमें देवता भैंसे पर सवार हैं। इसलिए यह जमराज की मूर्ति है, क्योंकि शनिदेव की सवारी भैंसा नहीं। इसका उल्लेख किसी ग्रंथ में भी नहीं कि, शनिदेव ने कभी वाहन के रूप में भैंसे का इस्तेमाल किया हो।


भक्तों में आक्रोश

एक तरफ जहां पुलिसिया कार्रवाई की शहरभर में किरकिरी हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ मूर्ति चोरी होने से यहां भक्तों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। लोगों ने कुछ दिनों पहले बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा को इस मामले से अवगत कराया। वीडी शर्मा ने लहार पुलिस से कहा था कि, इस घटना को गंभीरता से लें। इसके बाद पुलिस एक्शन मोड में आई और रौन थाना इलाके से यमराज की मूर्ति ले आई। फिलहाल, यमराज की मूर्ति अब थाने के मालखाने में रख दी गई है। लेकिन, सवाल ये है कि, पुलिस द्वारा जिस मूर्ति को जब्त किया गया है, जब वो संबंधित मंदिर की नहीं है तो आखिरकार वो है कहां कि, इसकी पड़ताल कौन करेगा?

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