
मेट्रो प्रोजेक्ट: Photo Source - Patrika
Bhopal news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर की अधिकांश मुख्य सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं, जिसके कारण लगातार हादसे बढ़ रहे हैं। पत्रिका ने ऐसी ही एक प्रमुख सड़क 'रायसेन रोड' की ग्राउंड रियलिटी जांची। प्रभात चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक की दूरी 5.3 किलोमीटर है। शहरी इलाका होने के कारण इस दूरी को पूरा करने में अधिकतम 10 से 15 मिनट लगने चाहिए, लेकिन बाइक से इस दूरी को तय करने में 33 मिनट का समय लग रहा है। मेट्रो लाइन के निर्माण के कारण सड़कें सकरी हो गई हैं, सर्विस रोड पर अवैध अतिक्रमण है और यातायात नियमों का पालन कहीं नहीं हो रहा। 80 फीसदी सड़क पर डामर या सीमेंट का नामोनिशान नहीं है केवल गड्ढे, गिट्टी और धूल ही दिखाई देती है।
एचपी पेट्रोल पंपः ठेले, अवैध पार्किंग और ईंधन भराने आ रहे वाहनों के कारण सड़क पर फिर जाम मिला। धूल उड़ती गड्ढों वाली सड़क और मेट्रो निर्माण की सुस्ती यहां भी बरकरार थी।
बिजली कॉलोनी तिराहाः ठेलों के अवैध कब्जे और मेट्रो बैरिकेडिंग के कारण तिराहे पर लगातार अराजकता और जाम की स्थिति बनी हुई थी।
गोविंदपुरा बस स्टॉपः ऑटो, ई-रिक्शा और दुकानदारों का कब्जा था। पास के फुटपाथ की मशीन से खुदाई होने से पूरा माहौल धूलमय था।
आईटीआई के सामनेः मेट्रो कार्य के कारण रास्ते बंद होने से एक वाहन को 5 मिनट से अधिक जाम में फंसना पड़ा। डंपर उल्टी दिशा से आकर भेल की तरफ मुड़ रहे थे।
जेके रोड तिराहाः तिराहे पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। मीनाल की तरफ ऑटो-रिक्शा चालकों और स्ट्रीट वेंडर्स का जमावड़ा था। वहीं से शुरू होने वाली सर्विस रोड शोरूमों दुकानों के कर्मचारियों और ग्राहकों के वाहनों से पटी पड़ी थी।
सोनागिरी (सीएंडडी वेस्ट): ईंट, गिट्टी और सीमेंट आदि की करीब 20 दुकानें होने के कारण 50 के करीब बड़ी दुकानों के सामने, सर्विस रोड, दुकानों के बगल और मुख्य सड़क-सर्विस रोड के बीच सीएंडडी वेस्ट (निर्माण सामग्री के मलबे) के ढेर लगे थे।
रत्नागिरी चौराहा: ट्रैफिक सिग्नल का कोई पालन नहीं हो रहा था। चारों तरफ ठेले और ऑटो-रिक्शा के कारण भारी जाम लगा था और मेट्रो कार्य से सड़क अत्यधिक सकरी हो चुकी थी।
Updated on:
07 Oct 2026 07:33 am
Published on:
07 Oct 2026 07:33 am
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