
अफसरों के बंगले, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Bhopal news: सुप्रीम कोर्ट मास्टर प्लान जारी करने सरकार को निर्देश दे रहा है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।। 2021 की ड्राफ्ट प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसमें तालाब किनारे अनुमतियां व अन्य गड़बड़ियों को लेकर तत्कालीन सांसद ने आपत्ति ली और ड्राफ्ट रुक गया। इसके बाद बने 2031 के ड्राफ्ट में लो-लाइन एरिया में अफसरों के दस गुना क्षेत्रफल के आवास भारी पड़े। ये स्थितियां जारी है, जो शहर के नियोजित विकास में बाधा बनी हुई है। एक माह में ड्राफ्ट की बात हो रही है, लेकिन इसमें मिक्स लैंड यूज ही नही, वन-जलस्रोत, तालाब, वन क्षेत्र, बाघ कॉरिडोर, नालों से निर्माण की दूरी, मास्टर प्लान रोड समेत पुराने भोपाल के लिए अलग से प्रावधान करना बड़ी चुनौती।
अब प्रशासन भोपाल विजन 2047 और ईज ऑफ लिविंग को जोड़कनया मेट्रोपॉलिटन प्लान बनाने का दावा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जो तंत्र पिछले 20 सालों में 2021 और 2031 का प्लान लागू नहीं कर पाया, वह 2047 का खाका कब तक तैयार करेगा? तब तक राजधानी का विकास कैसे होगा?
हमने शहर के लिए प्लान तय किया था। प्लान में काफी मेहनत करना पड़ती है। शहर विकास के लिए प्लान को लागू करना चाहिए।- वीपी कुलश्रेष्ठ, रिटायर्ड टाउन प्लानर
Updated on:
25 Sept 2026 07:36 am
Published on:
25 Sept 2026 07:36 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
