
एमपी में पटवारियों ने फ्री रजिस्ट्री करने से मना किया PC- Chatgpt
Patwari : मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे।
वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे।
विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री
68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।
अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे।
बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है।
जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती।
नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजे�ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया।
मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे।
Updated on:
03 Oct 2026 09:54 am
Published on:
03 Oct 2026 09:41 am
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