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गुटखा-सुपारी खाने से मुंह खुलना बंद! AIIMS भोपाल ने खोजा बेहतर इलाज

Gutkha side effects: गुटखा और सुपारी की लत मुंह खोलने की क्षमता छीन सकती है और कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है। AIIMS Bhopal ने इसका बेहतर इलाज खोज निकाला है।
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भोपाल

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Akash Dewani

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Updated: 24 Oct 2026, 7:32 AM IST

gutkha side effects mouth opening problem aiims bhopal

Gutkha side effects: AIIMS भोपाल ने खोजा गुटखे से मुंह जाम हो जाने का बेहतर इलाज (फोटो सोर्स- Patrika)

Gutkha side effects: गुटखा और सुपारी की लत धीरे-धीरे मुंह खोलने की क्षमता छीन सकती है। स्थिति गंभीर होने पर खाना चबाना और बोलना तक मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, यह बीमारी मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ाती है। मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने के लिए एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने दो सर्जिकल तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इसमें ऑपरेशन के बाद मुंह खुलने की क्षमता (Mouth opening problem) और छह महीने तक उसके बरकरार रहने का आकलन किया गया। शोध फ्रांस से प्रकाशित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

मुंह के ऊतक सख्त होने से बढ़ती परेशानीः

ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis) मुंह की कैंसर-पूर्व स्थिति है। इसमें मुंह के अंदर के ऊतक धीरे-धीरे सख्त होने लगते हैं। इससे मुंह खोलने, भोजन करने और बोलने में परेशानी होती है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू युक्त उत्पादों का सेवन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। बीमारी गंभीर होने पर मुंह खोलने की क्षमता बहाल करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ सकता है।

एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) के शोध में गाल के भीतर मौजूद वसायुक्त गद्दी (बुक्कल फैट पैड) और त्वचा की पूरी मोटाई के प्रत्यारोपण (फुल-थिकनेस स्किन ग्राफ्ट) की तुलना की गई। अध्ययन में 28 मरीजों के उपचार संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। दोनों तकनीकों से ऑपरेशन के बाद मुंह खोलने की क्षमता में सुधार हुआ। छह महीने के आकलन में दोनों के परिणामों में महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। हालांकि, गाल की वसायुक्त गद्दी वाली तकनीक में अंदरूनी परत जल्दी बनी और ऑपरेशन में कम समय लगा।

एम्स में रोज 8 से 10 मरीज

एम्स भोपाल के डेंटल विभाग की ओपीडी में रोजाना इस बीमारी के करीब 8 से 10 मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

चिकित्सकों की सलाह

सुपारी, गुटखा और तंबाकू छोड़ें। मुंह खोलने में लगातार कमी, जलन या सफेद अथवा लाल धब्बे दिखने पर दंत विशेषज्ञ से जांच कराएं। सर्जरी के बाद भी नियमित निगरानी जरूरी है, क्योंकि इससे कैंसर का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता।

गुटखा खाने से होती है ये भी बीमारियां

  • गुटखा खाने से दांत पीले या लाल हो जाते हैं, मसूड़ों से खून आता है, मसूड़े कमजोर होते हैं और दांत ढीले होकर गिरने लगते हैं।
  • इसके सेवन से पेट में अल्सर, एसिड रिफ्लक्स, सीने में जलन और पेट या फूड पाइप का कैंसर हो सकता है।
  • इसमें मौजूद निकोटीन और अन्य रसायन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर में बदलाव, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
  • गुटखा अत्यधिक नशीला और व्यसनकारी होता है। इसे छोड़ने पर घबराहट, सिरदर्द और ध्यान लगाने में परेशानी होती है।
  • गर्भवती महिलाओं द्वारा इसके सेवन से गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ता है और कम वजन वाले बच्चे का जन्म हो सकता है।