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Analysis: कहीं कांग्रेस का उलटफेर तो कहीं BJP की जीत, MP उपचुनाव के नतीजे क्या बता रहे 2027 का मूड?

Analysis: 2027 में मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव और 2028 में विधानसभा चुनाव होंगे...। हाल के उपचुनावों और राजनीतिक गतिविधियों से लगता है कि राजनीतिक दल अभी से चुनावी मूड में आने लगी हैं...।
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भोपाल

•

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Manish Gite

•

Oct 05, 2026

bjp congress political analysis 2027

Analysis- 2027 में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर क्या है राजनीतिक दलों का मूड। (विजुअल एआई जनरेटेड)

Analysis-क्या मध्यप्रदेश में अभी से चुनाव का मूड बनने लगा है, क्या राजनीतिक दल अभी से चुनावी मूड में है। हाल ही के उपचुनाव से उत्साहित भाजपा और कांग्रेस के नेता क्या चुनावी मूड में आने लगे हैं। दतिया उपचुनाव से लेकर नगरीय निकाय एवं पंचायत उपचुनाव के नतीजे क्या कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन क्या अभी से 2027 के नगरीय निकायय चुनावों का मूड बनता दिख रहा है। देखें एक विश्लेषण…।

दतिया में हुए उपचुनाव से कांग्रेस तो उत्साहित है ही, हाल ही में हुए नगरीय निकाय एवं पंचायत उपचुनाव के परिणामों ने एक बार फिर 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव का मूड दिखने लगा है। मध्यप्रदेश में 103 पदों पर हुए पंचायत उपचुनाव के बाद कहीं भाजपा तो कहीं कांग्रेस में उत्साह देखने को मिला। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां कांग्रेस को ताकत मिली है, जबकि कई इलाकों में भाजपा ने जीत दर्ज कर उत्साह व्यक्त किया है। मध्यप्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में नगरीय निकाय और पंचायत उपचुनाव हुए। लेकिन, दोनों ही दल इसे अपनी-अपनी बढ़त बता रहे हैं। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से उत्साहित कांग्रेस खेमे में भी खुशी है, क्योंकि कई वार्ड ऐसे हैं जहां उन्होंने जीत हासिल की है।

दतिया के विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद से कांग्रेस खेमे में काफी उत्साह देखने को मिल रहा था। कांग्रेस तो यह 2028 के विधानसभा चुनाव का ट्रेलर कर रही थी। हालांकि इससे पहले नगरीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए दोनों ही दल किसी न किसी तरह से माहौल अभी से बनाते नजर आ रहे हैं।

सुसनेर में भाजपा हावी

मध्यप्रदेश में आगर मालवा जिले में सुसनेर नगर परिषद को लेकर भाजपा खेमे में खुशी है। यहां भाजपा के प्रदीप सोनी जीते हैं, जबकि विष्णु पाटीदार को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार की है। हालांकि कांग्रेस विधायक भेरूसिंह परिहार ने बीजेपी की जीत पर सवाल उठाया है कि चुनाव में धनबल का इस्तेमाल हुआ है, जिसका फायदा बीजेपी ने उठाया है। हालांकि भाजपा और कांग्रेस में जीत का अंतर कोई ज्यादा नहीं है, महज 960 वोटों का अंतर है।

भाजपा के क्षेत्र में कांग्रेस को बढ़त

इसके अलावा पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के निवाली जनपद पंचायत के वार्ड में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उलटफेर कर दिया। यहां बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के मुकाबले कांग्रेस समर्थित अनीता गजानंद सोलंकी ने 1892 वोट से उपचुनाव जीता था। बीजेपी के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि पानसेमल विधानसभा क्षेत्र से श्याम बड़से बीजेपी के ही विधायक है। उनके क्षेत्र में कांग्रेस का जीतना राजनीतिक बढ़त की दृष्टि से देखा जा रहा है।

खरगोन में कांग्रेस को मिली ताकत

निमाड़ क्षेत्र के खरगोन जिले में कांग्रेस को ताकत मिली है। जिला पंचायत वार्ड 19 के उपचुनाव में कांग्रेस ने बाजी मार ली। इस जीत पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व मंत्री सचिन यादव का उत्साह बढ़ता दिख रहा है। जिला पंचायत सदस्य भारत यादव ने भी अपनी जीत का श्रेय कांग्रेस कार्यकर्तांओं के साथ सचिन यादव को दिया है

राजनगर की सीलोन पंचायत में भाजपा की जीत

राजनगर की सीलोन पंचायत में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार रामसखी पटेल ने जीत हासिल की। िसी जिले की मऊमसानिया पंचायत में बीजेपी समर्थित निहारिका पाठक ने जीत हासिल की। इस क्षेत्र में भी भाजपा का उत्साह बढ़ा है।

रीवा सांसद के बेटे को मिली जीत

इधर, रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के बेटे अंकुर मिश्रा ने भी जीत दर्ज कर अपने प्रभाव बरकरार रखा है। सिरमौर ब्लाक की ग्राम पंचायत हिनौता में सरपंच पद पर चुनाव जीते हैं। भाजपा सांसद के बेटे की जीत पर क्षेत्र में चर्चा है कि अब अंकुर मिश्रा को राजनीति में आगे बढ़ाया जाएगा। वे आगे आने वाले चुनावों में भी किस्मत आजमा सकते हैं।

हरदा में कांग्रेस को मिली ताकत

नर्मदापुरम संभाग के हरदा जिले में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को ताकत मिली है। यहां कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य वार्ड 9 से चुनाव जीती थी। खास बात यह है कि कभी भाजपा का गढ़ रहे हरदा में डा. रामकिशोर दोगने कांग्रेस से विधायक हैं। उनके क्षेत्र में कांग्रेस की जीत होने पर कार्यकर्ताओं में उत्साह बरकरार है। दोगने से पहले कमल पटेल भाजपा के विधायक रह चुके हैं और मंत्री भी रहे। उनका प्रभाव कम होने लगा। वे पिछले विधानसभा चुनाव में महज 872 वोटों से हार गए थे। क्षेत्र में भाजपा में चल रहे भितरघात का ही असर रहा कि पड़ोसी विधानसभा सीट टिमरनी में भी भाजपा के संजय शाह सुखदेव पांसे से चुनाव हार गए थे। इसके बाद दोनों ही विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का प्रभाव बढ़ गया है।

क्या बड़े नेताओं का कोई असर

मध्यप्रदेश में फिलहाल कांग्रेस हमलावर है। अनेक मुद्दों पर राज्य सरकार को घेर रही है। यही कारण है कि इंदौर में राहुल गांधी आए थे और उन्होंने छात्रों की गूंज कार्यक्रम किया था। इस 13 दिन बाद ही वे बालाघाट आए और बीमारी से मृत हुए बच्चों के परिजनों से मुलाकात की थी और स्वास्थ्य और शिक्षा का मुद्दा उठाया था। इधर, भाजपा ने भी शिक्षा को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के कई दावे किए हैं। कुल मिलाकर पिछले कुछ समय से भाजपा और कांग्रेस में तकरार बढ़ी है और दोनों ही दल इसे अभी से चुनावी दृष्टिकोण से देख रहे हैं।