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Success Story: 150 रुपए महीने में धोए बर्तन, बचपन में हुए अनाथ, आज 10 परिवारों का सहारा बने परमाल सिंह

Success Story: 50 वर्षीय परमाल सिंह यादव ने बचपन में अनाथ होकर मवेशी चराने और होटल में बर्तन धोने जैसे छोटे कामों से शुरुआत की। आज मेहनत और हौसले से वे अपना सफल होटल चला रहे हैं तथा 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
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होटल मालिक परमाल सिंह (Photo Source - Patrika)

होटल मालिक परमाल सिंह (Photo Source - Patrika)

नीलम सिंह यादव

Success Story: अगर हौसले बुलंद हों और मेहनत करने का जज्बा हो, तो इंसान किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है मुंगावली के 50 वर्षीय परमाल सिंह यादव ने। बचपन में ही अनाथ हो जाने वाले परमाल सिंह ने कभी गांव में दूसरों के मवेशी चराए, तो कभी 150 रुपए महीने की पगार पर होटल में बर्तन धोए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वह मुंगावली में अपना खुद का एक सफल होटल संचालित कर रहे हैं। यही नहीं, कभी दूसरों के यहां मजदूरी करने वाले परमाल आज 10 लोगों को अपने होटल में रोजगार देकर उनका घर भी चला रहे हैं।

बचपन में छोड़ गए मम्मी-पापा

परमाल सिंह की कहानी बेहद भावुक व प्रेरणादायी है। जब वह महज डेढ़ साल के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद जब वह 4 साल के हुए तो पिता भी इस दुनिया से चल बसे। इसके बाद गुन्हेरु गांव में रहने वाले उनके मामा उन्हें अपने साथ ले गए। मामा मजदूरी करके उनका पालन-पोषण करते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब परमाल 10-11 साल के हुए, तो उनके मामा का भी देहांत हो गया। इसके बाद वह इस दुनिया में बिल्कुल अकेले रह गए।

पेट पालने के लिए चराए मवेशी

अकेलेपन व गरीबी से जूझते हुए गांव में ही दूसरों की गाय-भैंस चराकर गुजारा किया। मुंगावली आकर होटल पर 150 रुपए महीने में काम शुरु किया। ईमानदारी से काम किया तो तनख्वाह 200 और फिर 400 रुपए महीने तक पहुंची। इसी छोटी सी कमाई से पैसे बचाना शुरु किया और 20-25 हजार रुपए इकट्ठे किए। खुद का छोटा होटल खोला। लेकिन पास में पहले से एक और होटल संचालित था। इससे आए दिन के विवादों व मारपीट से परेशान होकर उन्हें अपना होटल बंद करना पड़ा। फिर से बाजार में दूसरी जगह नौकरी व मजदूरी की। कुछ और पैसे जमा किए और फिर से बाजार में अपना होटल शुरु किया।

आज खुद का घर, गाड़ी और 10 कर्मचारियों का स्टाफ

दूसरी बार की गई मेहनत रंग लाई और उनका होटल चल निकला। आज परमाल सिंह संपन्न और सफल व्यक्ति हैं। उनके पास अपना खुद का पक्का मकान व गाड़ी है। अपनी मेहनत से उन्होंने अपनी गृहस्थी बसाई। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस व्यक्ति ने कभी मजदूरी कर अपना पेट पाला था, आज उनके होटल में 10 कर्मचारी काम करते हैं। सफलता के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी परमाल सिंह अपनी जड़े नहीं भूले हैं। वह आज भी सुबह 5 बजे उठकर होटल खोलते हैं और खुद अपने हाथों से सब्जी बनाने से लेकर सारा काम संभालते हैं।

युवाओं को प्रेरणा: कोई काम छोटा नहीं होता

परमाल सिंह यादव आज के उन युवाओं को प्रेरणा हैं जो खाली बैठे रहते हैं या काम को छोटा-बड़ा समझते हैं। युवाओं को उनका संदेश है कि खाली बैठने से कुछ नहीं होगा। कोई भी काम छोटा नहीं होता। पूंजी नहीं है तो छोटे से शुरुआत कर थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाएं और आगे बढ़े। अगर थोड़ी पूंजी है, तो कोई भी छोटी सी दुकान खोल लें। ईमानदारी से की गई मेहनत जरूर रंग लाती है।