
कोरोना और आर्थिक संकट के बावजूद शहर के रियल स्टेट सेक्टर में तेजी, स्मार्ट सिटी और मेट्रो रेल से बढ़ेगी रफ्तार
भोपाल/ भारत के उभरते शहरों में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक खास नाम है। हालही में देश समेत विश्वभर कोरोना महामारी और आर्थिक संकट जैसी चीजों से दो चार हुआ है। बावजूद इसके शहर में रियल एस्टेट ने एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ ली है। व्यवसायीक और आवासीय निर्माण तो शहर में चारों ओर देखे जा सकते हैं। यहां निवेश करने वाले एक बार फिर ऊंचा मुनाफा कमाने लगे हैं।
बिल्डरों को दोगुना मुनाफा
देश के दूसरे शहरों के बिल्डर्स को जहां 14 फीसदी की ग्रोथ मिल रही है, वहीं भोपाल का रियल एस्टेट का बाजार दोगुनी रफ्तार से बढ़ा है। तेजी से डेवलप हो रहे शहर में 3 हजार करोड़ की लागत से स्मार्ट सिटी डेवलप की जा रही है। शहर के बीचो बीच स्थित शिवाजी नगर और तुलसी नगर में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट के साकार होने के बाद नए शहर की तस्वीर बदल जाएगी। स्मार्ट सिटी के लिए किया गया निवेश शहर की रफ्तार को तेज करेगा। वहीं, दूसरी तरफ भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की तेजी से आकार ले रहा है। मेट्रो शुरु होने के बाद भोपाल की डेवलपमेंट प्रक्रिया की रफ्तार दस गुना बढ़ने के आसार हैं।
आगामी तीन सालों में जमीन पर होगी स्मार्टसिटी
आने वाले तीन सालों में स्मार्ट सिटी के काम का इम्पैक्ट दिखने लगेगा। भोपाल में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी में वर्तमान से ज्यादा हरियाली होगी। लोगों को भरोसे में लेकर ही शिफ्टिंग कार्य शुरु किया जाएगा।
मास्टर प्लान में अब 51 नए गांव भी हुए शामिल
वहीं, दूसरी और भोपाल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। भोपाल मास्टर प्लान में अब 51 नए गांव भी जोड़े जा रहे हैं। इसके साथ ही प्लानिंग एरिया 813.92 वर्ग किमी से बढ़ कर 1016.90 वर्ग किमी कर दिया गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने बढ़े हुए प्लानिंग एरिया के मौजूदा लैंडयूज का नक्शा जारी इसपर 30 दिन के भीतर दावे-आपत्ति बुलाई है। इसके बाद पूरे प्लानिंग एरिया का लैंडयूज नए सिरे से तैयार किया जाएगा। साल के अंत तक नगर निगम चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी हो सकता है। नए प्लानिंग एरिया की सीमा उत्तर दिशा में सूखी सिवनिया, पूर्व में बंगरसिया, दक्षिण में बगरोदा और पश्चिम में आमला तक होगी। प्लानिंग एरिया बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में शामिल गांवों को मास्टर प्लान में जोड़ा जा सके। इसके बाद इन गांवों के लिए डेवलपमेंट रूल्स तैयार कर उन्हें मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा।
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Updated on:
21 Dec 2020 05:02 pm
Published on:
21 Dec 2020 05:02 pm
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