वन विभाग, ग्राम वन समिति और बांस उत्पादक स्व-सहायता समूह के बीच त्रिपक्षीय अनुबंध होगा। उल्लेख होगा कि, खेती करने वाली वनभूमि पर समूह का कोई अधिकार नहीं होगा। वो सिर्फ बांस का उत्पादन करेंगे। बांस विक्रय से मिलने वाली राशि पर पूरा अधिकार उस परिवार का होगा, जो शुरुआत से देखरेख कर रहा है। बिक्री की राशि में से 20 फीसदी समिति के खाते में जाएगी। शेष राशि परिवार का मुनाफा होगी।