
डोडा पोस्त तस्करी के आरोपी मनीष बिश्नोई से पूछताछ में महेन्द्र बिश्नोई और कथित मददगारों के बारे में अहम जानकारियां
बीकानेर. डोडा पोस्त तस्करी के आरोपी मनीष बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद अब उसके कथित नेटवर्क की परतें खोलने में पुलिस जुटी है। जांच का दायरा तस्करी में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों और अलग-अलग ठिकानों से आगे बढ़कर कथित मददगारों, अवैध संपत्ति और पुलिसकर्मियों की भूमिका तक पहुंच गया है। बीकानेर, श्रीगंगानगर और जोधपुर ग्रामीण के कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आने की बात पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने कही है। संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि फरारी के दौरान मनीष को किसने और किस तरह मदद पहुंचाई तथा कथित तस्करी से अर्जित संपत्ति कहां-कहां है।
एसपी के मुताबिक, पांचू थाना क्षेत्र के कुदसू निवासी मनीष बिश्नोई पुत्र भैराराम विश्नोई कथित तौर पर प्रदेश के पांच से सात जिलों में डोडा-पोस्त का कारोबार कर रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने और वाहन बदलता रहता था। तस्करी में स्कॉर्पियो, इनोवा, क्रेटा, स्विफ्ट और कैंपर जैसी गाड़ियों के इस्तेमाल की जानकारी मिली है।
पुलिस के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को खाजूवाला में दबिश के दौरान मनीष के पास दिल्ली से चोरी की गई एक गाड़ी मिली थी। उस समय गाड़ी में छोटूराम और नरसीराम मौजूद थे, जबकि पुलिस को देखकर मनीष मौके से भाग गया था। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि चोरी की गाड़ी मनीष तक कैसे पहुंची और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।
19 सितंबर 2025 को रामप्रसाद बिश्नोई की रिपोर्ट पर पांचू थाने में जानलेवा हमले और फायरिंग का मामला दर्ज किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, रामप्रसाद और अनोपाराम घरेलू सामान लेने जा रहे थे। इसी दौरान बिना नंबर की कार में सवार मनीष, सुखराम, महेन्द्र, छोटूराम और दो-तीन अन्य लोगों ने फायरिंग कर दी थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। पुलिस ने मामले में चालान पेश किया था, लेकिन बाद में अदालत ने एफआईआर निरस्त कर दी। इस प्रकरण का उल्लेख मौजूदा जांच के संदर्भ में सामने आया है।
पुलिस अब मनीष की संपत्ति का ब्योरा जुटाने के साथ कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास है कि कथित कारोबार से अर्जित संपत्ति कहां-कहां है, तस्करी में किन लोगों ने सहयोग किया और फरारी के दौरान किसने उसे संसाधन उपलब्ध कराए। पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है।
गिरफ्तारी से बचने के लिए मनीष ज्यादातर समय गाड़ी में ही रहता था। अब जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि फरारी के दौरान उसे ठिकाने, वाहन और अन्य संसाधन किन लोगों ने उपलब्ध कराए। मनीष से पूछताछ में बनिया निवासी महेन्द्र बिश्नोई के पास चार हथियार होने की जानकारी सामने आई है। संभावित कार्रवाई की भनक लगने के बाद महेन्द्र के फरार होने की जानकारी मिली है।
मनीष बिश्नोई के नेटवर्क में बीकानेर, श्रीगंगानगर और और जोधपुर ग्रामीण के कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। उनके संबंध में जांच शुरू कर दी गई है। तथ्यों की पुष्टि के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- मृदुल कच्छावा, पुलिस अधीक्षक, बीकानेर
Updated on:
12 Oct 2026 11:50 am
Published on:
12 Oct 2026 11:49 am
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