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सीआई की पहल लाई रंग, अपराधों में आई कमी, कैसे? जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे में चोरी-छिपे नहीं बिकती शराब, जुए व सट्टे पर अंकुश, अपराधों में आई कमी
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बीकानेर

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Anushree Joshi

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Updated: 3 Oct 2017, 8:54 AM IST

sri Dungargarh police hard work against crime

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे में रात आठ बजे के बाद अब चोरी-छिपे शराब नहीं बिकती है। कस्बे में जुए-सट्टे के धंधे पर अंकुश लगा है। झूठे मुकदमों में कमी आई है वहीं कस्बे में सामाजिक सौहार्द वाला माहौल बना है। यह संभव हुआ है सोशल पुलिसिंग की वजह से। पिछले डेढ़ साल में कस्बे में पुलिस की छवि सुधरने के साथ धरातलीय स्तर पर अपराधों में कमी आई है।

वास्तविकता में पुलिस ने कानून के दायरे में वह सब किया है जो उसका दायित्व है और इसका श्रेय जाता है श्रीडूंगरगढ़ पुलिस थाने के प्रभारी सीआई विष्णुदत्त बिश्नोई को। आपको बता दें कि 'आमजन में विश्वास और अपराधियों में भय' आमतौर पर इस तरह की पंक्तियां पुलिस थानों में लिखी हुई मिलती है, मगर अपराधियों की बजाय आमजन में ही पुलिस का भय बना रहता है लेकिन सीआई बिश्नोई ने इसके इतर जाकर इन पक्तियों को साकार कर दिखाया है।

जनसहयोग से 25 लाख का विकास कार्य
सीआई विष्णुदत्त ने जनसहयोग से थाने की साज-सज्जा व्यवस्थाओं के लिए करीब २५ लाख रुपए खर्च करवाए हैं। मैस, डायनिग टेबल, मनोरंजकक्ष, बैरक, पुलिस फैमिली क्वार्टर एवं अतिथियों एवं अधिकारियों के लिए रेस्ट रूम बनाया है। अनुसंधान कक्ष, रिकॉर्डरूम, मालखाना का सुसज्जित करवाया।

यह प्रयोग रहा कारगर
सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने या शराब पीकर उत्पात मचाने वालों को थाने लेकर आना और बाद में परिजनों को बुलाकर उसे सौंपना। सार्वजनिक जगह बेवजह उत्पात मचाने और झगड़ा करने वालों को थाने लाकर पेड़-पौधों में पानी डलवाना और थाना परिसर में श्रमदान कराने जैसी सजा देने का प्रयोग काफी कारगर साबित रहा है।

इनसे अपराध हुए कम
नियमित सीएलजी मीटिंग, सुबह शाम और रात्रिकालीन गश्त, पारिवारिक झगड़ों का समझाइश से निस्तारण, खेत की सींव, भाई-भतीजा, बाप-बेटों के झगड़ों को पारिवारिक सदस्य की तरह से निबटाने को प्राथमिकता देना। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, झगड़ा करने पर रोक लगाने तथा रात आठ बजे बाद शराब बिक्री एवं जुए-सट्टे का धंधा नहीं करने के लिए पेम्फलेट बंटवाए, आटो रिक्शा से अनाउंसमेंट कराया। सामाजिक कार्यक्रमों में पुलिस का सहयोग करने और कानून व्यवस्था बनाने में सहयोग करने का प्रचार-प्रसार किया।

गत सालों की तुलना में अपराधों का गिरा ग्राफ
वर्ष 2014 में कुल 321, वर्ष 2015 में 326, वर्ष 2016 में 246 और वर्ष 2017 में अब तक केवल 160 मामले ही पुलिस थाने में दर्ज हुए हैं। इनमें पुलिस ने अवैध शराब बेचने के गत वर्ष की अपेक्षा चार और जुआ अधिनियम के आठ, एनडीपीएस के तीन मामले ज्यादा दर्ज किए हैँ।

महिलाओं से संबंधित आईपीसी की धारा 498 में वर्ष 2014 में 52, वर्ष 2015 में 44, वर्ष 2016 में 29 और वर्ष 2017 में केवल 20 ही मामले दर्ज हुए हैं। सीआरपीसी 151 के तहत वर्ष 2015 में 69 पेश किए गए जबकि वर्ष 2016 में 176 पेश किए गए। एमवी एक्ट की कार्रवाई गत वर्षों की तुलना में डेढ़ गुनी की गई।

सिस्टम किया मजबूत
हमारा प्रयास है कि थाना क्षेत्र में कानून का राज स्थापित हो, समाज में सद्भाव रहे और आमजन में पुलिस के प्रति सकारात्मक नजरिया हो। इसके मद्देनजर हमने सीएलजी सदस्यों, समाज के प्रमुख लोगों का सहयोग लेकर अवैध धंधों और झूठे मुकदमों पर अंकुश लगाया। कानून व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए हमने नियमित गश्त और बीट सिस्टम को मजबूत किया।
विष्णुदत्त बिश्नोई, सीआई श्रीडूंगरगढ़