
बिलासपुर का गोल बाजार (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Bilaspur Gol Bazar: बिलासपुर का सबसे पुराना और लोकप्रिय गोल बाजार आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत और व्यावसायिक सक्रियता के लिए जाना जाता है। इस बाजार का निर्माण सन् 1936 में किया गया था। इसे उस समय बिहारी अग्निहोत्री ने पेरिस की सिटी की तर्ज पर बनवाया था। उस दौर में यह शहर के लिए एक आधुनिक और सुनियोजित बाजार माना गया। पहले इस जगह को कुंजबिहारी अग्निहोत्री बाजार के नाम से जाना जाता था, लेकिन समय के साथ यह नाम बदलकर गोल बाजार हो गया। उस समय बाजार की संरचना चारों ओर से खुली थी।
आज गोल बाजार में करीब 300 से ज्यादा दुकानें हैं। यहां कपड़े, किराना, इलेक्ट्रॉनिक, आभूषण, मिठाई, पूजा सामग्री सहित हर तरह का सामान उपलब्ध है। यही कारण है कि लोग आज भी इसे भरोसे का बाजार कहते हैं। गोल बाजार में प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। यहां दूध, खोवा और जलेबी की पुरानी दुकानें अब भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
गोल बाजार का सबसे बड़ा लाभ इसका सुव्यवस्थित रोड नेटवर्क है। यहां 80 फीट चौड़ी सडक़ है, इसलिए पार्किंग की बड़ी समस्या नहीं होती। हालांकि, सदर बाजार चौक के जाम का असर कभी-कभी बाजार पर पड़ता है, लेकिन भीतर की सडक़ों पर यातायात सामान्य रहता है।
ऑनलाइन दौर में भी गोल बाजार की चमक: पहले लोग हर चीज लेने बाजार आते थे, अब मोबाइल से ऑर्डर करने लगे हैं, लेकिन गोल बाजार की बात ही कुछ और है। यहां की गारंटी, भरोसा और अपनापन ग्राहक को खींच लाता है।
हर्षित केशरवानी, व्यापारी के मुताबिक, बाजार सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं, हमारी पहचान है। यहां पीढ़ियों से व्यापार हो रहा है। ग्राहक आज भी हमें नाम से जानते हैं और भरोसे के साथ आते हैं। यही भरोसा इस बाजार की सबसे बड़ी पूंजी है।
कृष्ण मोहन पाण्डेय, अध्यक्ष, गोल बाजार के मुताबिक, गोल बाजार वो जगह है जहां शहर का हर व्यक्ति दिन में एक बार जरूर आता है, चाहे वो व्यापारी हो या ग्राहक। दूर-दूर के गांवों से भी लोग यहां खरीदारी के लिए आते हैं। 88 वर्षों से यह बाजार न सिर्फ व्यापार का केंद्र है बल्कि शहर की सांस्कृतिक और आर्थिक धड़कन भी है। आज जब ऑनलाइन व्यापार बढ़ रहा है, तब भी गोल बाजार अपनी पहचान, भरोसे और रौनक के साथ बिलासपुर की परंपरा को जीवित रखे हुए है।
Updated on:
27 Oct 2026, 12:18 PM IST
Published on:
27 Oct 2026, 12:18 PM IST
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