27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘लोग तुम्हें गलत नजरों से देखेंगे’, पिता की इस बात से बदल गई गोविंदा की मां की जिंदगी, एक्टिंग छोड़ बनीं थीं साध्वी

Govinda's Mother Nirmala Devi: गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी के बारे में बात करते हुए बताया कि उनकी मां ने एक्टिंग छोड़ और आध्यात्म की राह पकड़ी क्योंकि उनके पिता ने कहा कि अगर वो एक्टिंग के लिए बाहर निकलेंगी तो उनकी सुंदरता की वजह से सब उनको घूरेंगे।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

मुंबई

•

image

Rashi Sharma

•

Updated: 27 Oct 2026, 4:41 PM IST

Govinda's Mother Nirmala Devi

गोविंदा और उनकी मां निर्मला देवी की फोटोज। (फोटो सोर्स: IMDb and instagram- govinda_herono1)

Govinda's Mother Nirmala Devi: पिछले कुछ दिनों से सुनीता आहूजा संग अनबन और कोमल रानी के साथ अफेयर को लेकर चर्चा बटोर रहे बॉलीवुड एक्टर गोविंदा ने बताया कि वह अपनी दिवंगत मां निर्मला देवी के बहुत करीब थे। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उनकी मां हिंदी सिनेमा में एक मुख्य अभिनेत्री भी रह चुकी थीं। फिल्मों में आने के 10 साल के अंदर ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी, अपना सिर मुंडवा लिया और अपने पांच बच्चों की परवरिश करते हुए एक साध्वी बन गईं। गोविंदा इंटरव्यू में कहा कि अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं और उनको अपनी मां से ही 'मोह-माया से दूर रहने' का गुण मिला है।

गोविंदा ने अपनी मां के त्याग को याद किया

हाल ही में एबीपी लाइव से बात करते हुए गोविंदा ने बताया, "अभिनेत्री बनने के बाद, मेरी मां निर्मला देवी इतनी गरीब हो गईं कि हमारे बंगले का सारा सामान बेच दिया गया।" उन्होंने आगे कहा, "मेरे पिता ने उनसे कहा, 'निर्मला, तुम इतनी सुंदर हो कि जब तुम काम मांगने बाहर जाओगी, तो लोग तुम्हें घूरेंगे।' इसलिए, मेरी बेचारी मां ने अपना सिर मुंडवा लिया और एक साध्वी बन गईं।"

निर्मला देवी का एक्टिंग करियर

निर्मला देवी ने 1942 में वी.सी. देसाई की फिल्म 'सवेरा' से बतौर लीड एक्ट्रेस अपने करियर की शुरुआत की। वह एस.यू. सनी की 'गीत', रामा चौधरी की 'गाली' (1944), नानाभाई भट्ट की 'चालीस करोड़' (1946) और एम. सादिक की 'अनमोल रतन' (1950) जैसी फिल्मों में नजर आईं। 1942 में, वह अपनी फिल्म 'सवेरा' के को-स्टार अरुण कुमार आहूजा के साथ घर से भाग गई थीं। बाद में, 1948 में अरुण कुमार आहूजा के होम प्रोडक्शन 'सेहरा' में दोनों ने फिर साथ काम किया, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। 1951 में आई अपनी आखिरी फिल्म 'जय महालक्ष्मी' के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली।

एक्टिंग छोड़ने के बाद, निर्मला देवी आहूजा अपनी तीन बेटियों और दो बेटों की परवरिश में व्यस्त हो गईं। 'सेहरा' के फ्लॉप होने के बाद, गोविंदा के माता-पिता को बांद्रा के पॉश इलाके कार्टर रोड स्थित अपना बंगला छोड़ना पड़ा और वे मुंबई के उपनगर विरार में जाकर बस गए। बचपन में अपनी मां को संघर्ष करते देख, गोविंदा के मन में एक सफल स्टार बनने की जिद और गहरी हो गई। 2003 में 'रेंडेवू विद सिमी गरेवाल' शो के दौरान गोविंदा ने बताया था, "जब आप अपनी मां को जीवन के मुश्किल दौर से गुजरते हुए और बहुत संघर्ष करते हुए देखते हैं… वह हर चीज का सामना कर रही थीं। मैंने उन्हें हर मुश्किल से जूझते देखा था और मैं जल्द से जल्द हालात बदलना चाहता था।"

मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि मेरे बारे में कौन क्या कह रहा है

गोविंदा का मानना है कि मां की परवरिश का असर उन पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा, "ऐसी मां का बेटा होने के नाते, मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि मेरे बारे में कौन क्या कह रहा है। मैं तो उस तरफ ध्यान भी नहीं देता।" उन्होंने यह बात अपनी पत्नी सुनीता आहूजा के उन आरोपों के जवाब में कही, जिनमें सुनीता ने दावा किया था कि गोविंदा अपनी आने वाली होम प्रोडक्शन फिल्म 'रूपा' की एक बहुत छोटी सह-कलाकार, कोमल रानी के साथ उन्हें धोखा दे रहे हैं।

मां नहीं चाहती थीं कि मैं एक्टर बनूं

गोविंदा ने बताया कि जब उन्होंने मां से एक्टर बनने की इच्छा के बारे में बात की, तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उनका मानना ​​था कि गोविंदा फिल्म इंडस्ट्री के हिसाब से बहुत ज्यादा मासूम हैं। हालांकि, उनके पिता अरुण कुमार आहूजा, जो खुद भी एक एक्टर थे ने गोविंदा में अभिनय की क्षमता देखी थी। उन्होंने गोविंदा को उस रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए कहा, जिसे उन्होंने और उनकी पत्नी ने सालों पहले छोड़ दिया था।

जब मां के गुजर जाने के बाद खुद को खत्म करने के बारे सोचने लगे थे

1996 में गोविंदा की मां निर्मला देवी का निधन हो गया था। ANI के साथ एक भावुक बातचीत में, गोविंदा ने बताया था कि अपनी मां के गुजर जाने के बाद वे आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगे थे और इस भारी दुख से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे थे। अभिनेता ने याद करते हुए कहा, "मैं बहुत तकलीफ में था। मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। उस समय मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है; बस, अब और कुछ नहीं बचा।"

नर्मदा नदी के किनारे के एक बेहद भावुक पल को याद करते हुए, गोविंदा ने बताया कि वे पानी में उतर गए थे, यह सोचकर कि शायद वे किसी तरह अपनी मां से फिर मिल सकें। उन्होंने कहा, "मैंने सोचा कि मैं नदी में थोड़ा और आगे चला जाऊंगा और अपनी माँ से फिर मिल पाऊंगा। इसलिए, मैं नदी में उतर गया।"

बड़ी खबरें

View All

बॉलीवुड

मनोरंजन

ट्रेंडिंग