
प्रीति सप्रू ने बताया कैसे काट दिया गया था उनका रोल। (फोटो सोर्स: instagram- @pritisapru)
Priti Sapru: 80 के दशक की बेहतरीन अभिनेत्री प्रीति सप्रू ने 'अवतार', 'जागीर' और 'लावारिस' के सेट के अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि फिल्म निर्माताओं के साथ सोच न मिलने के कारण उनके रोल बदल दिए गए थे। 'बॉलीवुड ठिकाना' के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे अपमानित महसूस होने पर वह सेट से बाहर आ गईं, एक फिल्म निर्माता को खाना परोसने से मना कर दिया, और प्रकाश मेहरा द्वारा 'पागल' कहे जाने पर उन्हें करारा जवाब दिया।
राजेश खन्ना और शबाना आजमी स्टारर 1983 की फिल्म 'अवतार' की शूटिंग को याद करते हुए प्रीति ने बताया कि सेट पर उनको तब बहुत गुस्सा आ गया था, जब कोरियोग्राफर ने लीड एक्टर्स को उनके नामों से बुलाया, लेकिन उन्हें और सचिन पिलगांवकर को सिर्फ 'लड़का और लड़की' कहकर बुलाया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा जैसे उनके साथ किसी जूनियर आर्टिस्ट जैसा बर्ताव किया जा रहा है, इसलिए वह सेट से बाहर आ गईं।
उन्होंने बताया, 'अवतार' की शूटिंग के दौरान एक गाना फिल्माया जा रहा था, जिसके कोरियोग्राफर सुरेश मास्टर जी थे। शूटिंग के समय उन्होंने काकाजी (राजेश खन्ना) और शबाना जी को उनके नामों से बुलाया। लेकिन सचिन और मुझे हमारे नामों से बुलाने के बजाय, उन्होंने कहा, 'उस लड़के और लड़की को बुलाओ।' मुझे लगा कि क्या हम जूनियर आर्टिस्ट हैं? मैं सेट से बाहर आ गई और चली गई।"
बता दें कि 'अवतार' में प्रीति ने रमेश की पत्नी 'शोभा' का किरदार निभाया था। मोहन कुमार द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक बुजुर्ग जोड़े की कहानी थी, जो अपने परिवार के लिए सालों तक त्याग करने के बाद अपने ही बेटों द्वारा किए जा रहे बुरे बर्ताव का सामना कर रहे थे।
इसके साथ ही एक्ट्रेस ने 1984 की प्रमोद चक्रवर्ती द्वारा निर्देशित फिल्म 'जागीर' के सेट हुए बुरे अनुभव को भी याद किया। उन्होंने बताया, “मैं डैनी जी के जन्मदिन की पार्टी में गई थी। यह शूटिंग का दूसरा ही दिन था और पूरी यूनिट को बुलाया गया था। मुझे याद है कि प्रमोद चक्रवर्ती जी पैक-अप के बाद, काफी थके हुए और देर से पहुंचे थे। उनकी एक आदत थी, जैसा कि कुछ बड़े फिल्ममेकर्स की होती है, कि वे चाहते थे कि एक्टर्स उनकी तारीफ करें या उन्हें खुश रखें।
“वहां पहुंचते ही उन्होंने कहा, ‘प्रीति, जरा मुझे खाना परोस दो।’ मुझे हैरानी हुई कि वह मुझसे ऐसा क्यों कह रहे हैं। मैं फिल्म में एक एक्टर थी, तो मुझे उन्हें खाना क्यों परोसना चाहिए? डैनी जी के सेक्रेटरी मदन जी ने मुझसे कहा, ‘प्रीति, बस खाना परोस दो, इससे क्या फर्क पड़ता है?’ लेकिन मैंने मना कर दिया।”
“अगले दिन, उन्होंने मुझे अमरीश पुरी जी के पीछे खड़ा कर दिया। मैंने उनसे कहा, ‘सर, आपने मुझे जो रोल बताया था, वह अभी मुझसे जो करवाया जा रहा है, उससे बिल्कुल अलग है।’ मैंने उनसे कहा कि मेरा नाम ‘गेस्ट अपीयरेंस’ में डाल दें, क्योंकि मैं पहले ही एक दिन की शूटिंग पूरी कर चुकी थी।” “उन्होंने मुझसे कहा, ‘मेरे पास जीनत अमान हैं। मैं तुम्हारा नाम नहीं दूंगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि मैं फिल्म इंडस्ट्री में ज्यादा दिन नहीं टिक पाऊंगी।” 'जागीर' में धर्मेंद्र, जीनत अमान, डैनी डेन्जोंगपा और अमरीश पुरी जैसे कलाकार शामिल थे।
प्रीति ने 1981 की फिल्म 'लावारिस' में काम करने के अपने अनुभव के बारे में भी बात की। इस फिल्म का निर्देशन प्रकाश मेहरा ने किया था और इसमें अमिताभ बच्चन और जीनत अमान मुख्य भूमिकाओं में थे। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग के लिए कश्मीर जाने से कुछ 40 दिन पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था, और शूटिंग के दौरान वह गहरे दुख में थीं। "मैंने अपने पिता को खो दिया था, और उनके निधन को अभी 40 दिन भी नहीं हुए थे। मैं कश्मीर में 'लावारिस' की शूटिंग कर रही थी। मेरी हालत ऐसी थी कि हर शॉट के बाद, मैं जाकर एक तरफ अकेली खड़ी हो जाती थी।" "उस समय प्रकाश मेहरा जी एक बहुत बड़े फिल्म निर्माता थे। उन्होंने सुरेश ओबेरॉय से पूछा कि क्या मैं थोड़ी पागल हो गई हूं, क्योंकि मैं हर शॉट के बाद जाकर अकेली खड़ी हो जाती है।"
प्रीति ने बताया कि बाद में जब उनकी मुलाकात प्रकाश मेहरा से हुई, तो उन्होंने सीधे उनसे इस बारे में बात की। और उनसे पूछा, 'क्या आपने कहा था कि मैं पागल हूँ?' उन्होंने जवाब दिया कि यह तो बस एक राय की बात है। मैंने उनसे कहा, 'दूसरों की राय मेरे लिए कोई मायने नहीं रखती।'"
प्रीति ने माना कि प्रकाश मेहरा जैसे बड़े फिल्म निर्माता को सीधे चुनौती देना कोई आम बात नहीं थी, खासकर तब जब कोई नया कलाकार हो। उन्होंने कहा कि हो सकता है उस समय उनके दुख ने उनके मानसिक स्थिति पर असर डाला हो, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने सेट पर ऐसा कुछ किया था जिसके लिए उन्हें 'पागल' कहा जाए।
प्रीति सप्रू एक अभिनेत्री और फिल्म निर्माता हैं, जो मुख्य रूप से पंजाबी सिनेमा में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। वह दिग्गज अभिनेता डी.के. सप्रू की बेटी हैं, और अभिनेता तेज सप्रू तथा पटकथा लेखिका रीमा राकेश नाथ की बहन हैं। उन्होंने 'लावारिस' (1981) और 'अवतार' (1983) जैसी हिंदी फिल्मों में काम किया। बाद में, 'निम्मो' और 'कुर्बानी जट्ट दी' जैसी फिल्मों के ज़रिए वह पंजाबी सिनेमा का एक जाना-माना चेहरा बन गईं। उन्होंने एक लेखिका और निर्देशक के तौर पर भी काम किया है।
Updated on:
21 Oct 2026 05:50 pm
Published on:
21 Oct 2026 05:50 pm
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