
नैनवां. इंद्राणी बांध जो पूरा नहीं भर पाया।
नैनवां. इस वर्ष कम बरसात का असर नैनवां उपखंड के जलाशयों पर भी पड़ा है। जल संसाधन विभाग के उपखंड क्षेत्र के पांच बांध पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए। बांधों में पानी की आवक कम रहने से इनसे सिंचित होने वाले गांवों के किसानों को रबी की फसलों के लिए सिंचाई का पूरा पानी नहीं मिल पाएगा। बांधों के पूरी तरह भरने पर किसानों को सिंचाई के लिए तीन बार पानी उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन इस बार जलस्तर कम रहने से किसी बांध से अधिकतम दो बार ही पानी मिलने की संभावना है। 25 फीट भराव क्षमता वाले पाईबालापुरा बांध में 21.60 फीट, 24.50 फीट क्षमता वाले गोठड़ा बांध में 17.60 फीट, 10 फीट क्षमता वाले दुगारी बांध में 6 फीट, 18 फीट क्षमता वाले इंद्राणी बांध में 14.80 फीट तथा 9 फीट क्षमता वाले बंसोली बांध में 7 फीट पानी रह गया।
पाईबालापुरा बांध में से नैनवां शहर और देई कस्बे की पेयजल आपूर्ति के लिए 17 फीट पानी रिजर्व रखना होता है। ऐसे में बांध में मौजूद 21.60 फीट पानी में से महज 4.60 फीट पानी ही सिंचाई के लिए उपलब्ध है। इससे इस बांध से सिंचित क्षेत्र के किसानों को रबी फसल के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा।
उपखंड क्षेत्र के माछली, बटावदी, मोतीपुरा और रुनिजा बांध ही पूरी क्षमता तक भर पाए हैं। माछली बांध की भराव क्षमता 13 फीट, बटावदी की 10 फीट, मोतीपुरा की 17 फीट तथा रुनिजा बांध की 24 फीट है। जल संसाधन विभाग नैनवां के सहायक अभियंता नीरज कुमार मीणा ने बताया कि उपखंड के पांच बांध पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं। इन बांधों से ङ्क्षसचित क्षेत्र के किसानों को रबी की फसल के लिए ङ्क्षसचाई का पूरा पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
नैनवां उपखंड में इस वर्ष मानसून ने पिछले साल की तुलना में बेहद कम पानी बरसाया। पिछले वर्ष जहां 2309 मिमी (करीब 93 इंच) बारिश दर्ज हुई थी और इसने एक सदी के बारिश के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, वहीं इस वर्ष अब तक 851 मिमी बारिश ही हुई है। हालांकि यह आंकड़ा नैनवां की औसत वार्षिक वर्षा 750 मिमी से अधिक है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले यह करीब एक-तिहाई ही है। बारिश कम रहने का असर यह हुआ कि उपखंड के पांच बांध भर नहीं पाए।
पिछले साल 23 अगस्त को 24 घंटे में ही 502 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। इस असाधारण बारिश से नैनवां शहर के साथ दुगारी, बांसी सहित उपखंड के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। शहर के कनकसागर तालाब की पाल से पानी ओवरफ्लो होने का सिलसिला भी लंबे समय तक जारी रहा था। पिछले साल की इसी रिकॉर्ड बारिश के कारण दोनों वर्षों के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
तहसील कार्यालय में संधारित वर्षवार बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया कि नैनवां में बारिश का मिजाज लगातार बदलता रहा है। 1981 से 2010 के बीच 30 साल ऐसे रहे, जब वार्षिक बारिश औसत 750 मिमी तक भी नहीं पहुंच सकी। इनमें 1989 सबसे सूखा वर्ष रहा, जब महज 196 मिमी बारिश हुई। इसी तरह 1980 में 418, 1984 में 296, 1985 में 373, 1987 में 252, 1988 में 330, 1990 में 384, 2002 में 259, 2003 में 371 और 2009 में 323 मिमी बारिश दर्ज की गई।
Updated on:
07 Oct 2026 12:23 pm
Published on:
07 Oct 2026 12:22 pm
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