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कुदरती सुंदरता को बढ़ा रहें,पलाश के फूल

पलाश के हरे पेड़ो पर रक्तवणी फूल और कलियां प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहें है।
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बूंदी

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Suraksha Rajora

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Updated: 21 Mar 2018, 2:33 PM IST

Increase natural beauty, flower of palash

बूंदी-इन दिनों हर तरफ पलाश के फूल कुदरती सुंदरता को बढ़ा रहें है। टेसू के इन्ही फूलों से परम्परागत रंग तैयार कर आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में होली खेली जाती है। पलाश के हरे पेड़ो पर रक्तवणी फूल और कलियां प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहें है। बसंत का आगाज होने के साथ ही पलाश के फूल जंगलो में शोभा बढ़ाते नजर आते है।

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फागुन का आगमन के साथ हाडोती के जगलों में केसरिया रंग के ये फूल शोभा बढ़ाते जो शीत ऋतु की विदाई का संकेत देते है। नेचर प्रमोटर ए.एच जैदी ने बताया कि हाडोती के जंगल इन फूलों से महक उठते है। हाडोती के मुकंदरा में तो टेसू के फूल ऐसे लगते है मानो जंगल में आग लग रही हो यही हाल सीताबाड़ी सें शाहबाद क्षेत्र का है, बूंदी का रामगढ़ विषधारी अभ्यारण्य में अधिक संख्या में टेसू के फूल दिखाई देते है। झालावाड़ में दरा ये गागरोन मार्ग में भी देखा जा सकता है।

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पूर्व में खाखरे के पेड़ गांवो में भी हुआ करते थे लेकिन अवैध कटाई के कारण अब धीरे-धीरे यह समाप्त होने लगे है। मार्च से अप्रेल तक इन फूलों की रंगत बिखरती है। कई पेड़ तो फूलों से लदे नजर आते है अभी कहीं जगह पेड़ो में कलियां नजर आ रही है तो कहीं ये पेड़ फूलों से सजे है।

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इनको कई नामों से पुकारा जाता है। टेसू, पलाश, खांखरा के नाम से जाने जाते इन पेड़ो के पत्तों से भोजन के लिए पत्तल- दोने बनाए जाते है, फूलों से रंग बनाया जाता है। लेकिन अब पत्तल दोने का चलन कम हो गया है। उस की जगह कागज व अन्य सामग्री ने ले ली है।