
क्रेडिट कार्ड से कैश निकासी पर ब्याज देना होता है। (PC: AI)
क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना जरूरत के समय आसान विकल्प लग सकता है, लेकिन यह आपकी जेब पर भारी भी पड़ सकता है। अगर आप क्रेडिट कार्ड से 10,000 रुपये निकालते हैं, तो आपको मूल रकम के अलावा कैश निकालने की फीस, ब्याज और जीएसटी भी देना पड़ सकता है। खास बात यह है कि इस रकम पर ब्याज उसी दिन से लगना शुरू हो जाता है, जिस दिन आप कैश निकालते हैं। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने पर बिल चुकाने के लिए कुछ दिनों का ब्याज-फ्री समय मिलता है। लेकिन एटीएम से कैश निकालने पर यह सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में अगर आप पूरी रकम जल्दी नहीं चुकाते हैं, तो भुगतान का बोझ लगातार बढ़ता जाता है।
क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने पर बैंक आमतौर पर कैश एडवांस फीस वसूलते हैं। यह फीस निकाली गई रकम का एक तय प्रतिशत या न्यूनतम निश्चित राशि हो सकती है। दोनों में से जो रकम ज्यादा होती है, वह लागू की जा सकती है। इसके अलावा, निकाली गई रकम पर ब्याज भी देना पड़ता है। फीस और ब्याज पर लागू नियमों के अनुसार GST भी देना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक चार्ज आपके बैंक और क्रेडिट कार्ड की शर्तों पर निर्भर करेंगे।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आप क्रेडिट कार्ड से 10,000 रुपये निकालते हैं और आपके कार्ड पर कैश एडवांस फीस 2.5% है। मासिक ब्याज दर 3% यानी सालाना 36% है। इस हिसाब से कैश निकालने की शुरुआती फीस 250 रुपये होगी। इसके बाद निकाली गई रकम पर इस्तेमाल की अवधि के मुताबिक ब्याज लगेगा। फीस और ब्याज पर GST भी कुल खर्च बढ़ा सकता है।
मान लीजिए कि आपने 10,000 रुपये निकालकर 30 दिन बाद पेमेंट किया। ऊपर बताई गई दरों के आधार पर एक अनुमानित हिसाब इस तरह होगा।
| खर्च का विवरण | अनुमानित रकम |
|---|---|
| निकाली गई रकम | ₹10,000 |
| कैश एडवांस फीस (2.5%) | ₹250 |
| 30 दिन का ब्याज (3%) | ₹300 |
| फीस और ब्याज पर GST (18%, जहां लागू हो) | ₹99 |
| कुल अतिरिक्त खर्च | ₹649 |
| कुल भुगतान | ₹10,649 |
यह एक उदाहरण आधारित कैलकुलेशन है। वास्तविक रकम बैंक की ब्याज कैलकुलेशन, फीस, जीएसटी और भुगतान की तारीख के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने कार्ड की शर्तें जरूर जांचें। अगर आप पेमेंट में और देरी करते हैं, तो ब्याज बढ़ता जाएगा। इस वजह से क्रेडिट कार्ड से निकाली गई छोटी रकम भी महंगी पड़ सकती है।
पहले दिन से ब्याज: सामान्य खरीदारी के उलट, कैश एडवांस पर आम तौर पर निकासी की तारीख से ब्याज लगना शुरू हो जाता है। बिल बनने या भुगतान की आखिरी तारीख तक ब्याज-मुक्त समय नहीं मिलता।
अलग से निकासी फीस: बैंक कैश निकालने के लिए अलग फीस वसूल सकता है। इसलिए केवल निकाली गई रकम चुकाना पर्याप्त नहीं होता।
GST का अतिरिक्त बोझ: जहां लागू हो, कैश एडवांस फीस और ब्याज पर जीएसटी देना पड़ सकता है। इससे कुल खर्च और बढ़ जाता है।
रिवॉर्ड और कैशबैक का फायदा नहीं: क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने पर आम तौर पर रिवॉर्ड पॉइंट, कैशबैक या खरीदारी से जुड़े दूसरे फायदे नहीं मिलते।
कैश निकालने की अलग लिमिट: क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट और कैश निकालने की लिमिट अलग हो सकती हैं। कैश लिमिट अक्सर कुल क्रेडिट लिमिट से कम होती है।
Updated on:
2 Nov 2026, 5:10 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 5:10 PM IST
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