
पीएनबी फ्रॉड में बैंक ने कई ग्राहकों को रकम वापस कर दी है। (PC: AI)
ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच में कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद बैंक ने 15 ग्राहकों को करीब 7 करोड़ रुपये रिफंड कर दिए हैं। बैंक के मुताबिक, इस मामले में संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ी की कुल रकम अब करीब 25 करोड़ रुपये आंकी गई है। बाकी मामलों की जांच जारी है। बैंक ने भरोसा दिया है कि जांच पूरी होने के बाद प्रभावित ग्राहकों की बची हुई रकम भी लौटाई जाएगी।
यह मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पीएनबी शाखा का है। नेटवर्क-18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में इस मामले में करीब 11 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का जिक्र किया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर में 16 ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर यह रकम बताई गई थी। हालांकि, बैंक की जांच में संदिग्ध रकम का अनुमान बढ़कर करीब 25 करोड़ रुपये हो गया है।
इस कथित घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब संगीता नाम की एक ग्राहक अपने परिवार के साथ बैंक की सेक्टर पाई ब्रांच में पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं। पासबुक में 16 सितंबर की तीन ऐसी एंट्रियां मिलीं, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने इन लेनदेन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच के दौरान इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और वाउचर नहीं मिल सके। इससे गड़बड़ी का शक गहराया और बैंक खातों के लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू की गई।
सीबीआई ने इस मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी दीपांशी के खिलाफ कथित अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने बैंक के छह अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए। जांच के दायरे में बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दोनों शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। आरोप है कि रकम को कई खातों के जरिए इधर-उधर भेजा गया और फिर निकाला गया या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
बैंक की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दीपांशी ने 6 अन्य अधिकारियों की लॉगिन डिटेल का इस्तेमाल कर कोर बैंकिंग सिस्टम के जरिए अनधिकृत लेनदेन किए। यह भी आरोप है कि लेनदेन से जुड़े वाउचर नष्ट कर दिए गए थे। इसके अलावा, कुछ ग्राहकों के खातों से जुड़े मोबाइल अलर्ट बंद करने या उनमें बदलाव करने की बात भी सामने आई है। ऐसे अलर्ट ग्राहकों को खाते में होने वाले लेनदेन की जानकारी देते हैं। इन्हें बंद करने से खाताधारकों को संदिग्ध गतिविधियों का समय पर पता नहीं चल पाता।
बैंक की शुरुआती जांच में फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े कुछ संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में खातों में दूसरे लोगों को संयुक्त खाताधारक के रूप में जोड़ा गया। इसके बाद खाते की जानकारी में बदलाव किया गया और तय समय से पहले FD बंद कर दी गई। आरोपों के मुताबिक, FD से मिली रकम को संदिग्ध लोगों से जुड़े खातों में ट्रांसफर किया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। बैंक ने कहा है कि प्रभावित ग्राहकों के बाकी दावों की जांच पूरी होने के बाद उनकी रकम लौटाने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
Updated on:
2 Nov 2026, 2:08 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 2:08 PM IST
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