
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग 120 देशों से कबाड़ खरीदती है। (PC: AI)
कई लोगों के लिए पुरानी बैटरी सिर्फ कचरा है। लेकिन कमलेश जैन ने इसी कबाड़ में कारोबार की बड़ी संभावना देखी। साल 2013 में परिवार के मेटल कारोबार से जुड़े कमलेश ने समझा कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों में मौजूद सीसा दोबारा इस्तेमाल होने वाला कीमती कच्चा माल है। यही सोच आगे चलकर Jain Resource Recycling के कारोबार की नींव बनी।
भारत में हर साल बड़ी मात्रा में पुरानी बैटरियां निकलती हैं। पहले इनके रीसाइक्लिंग के तरीके काफी हद तक मैनुअल थे। इससे बैटरी के अंदर मौजूद धातु को निकालने और उसे बेहतर गुणवत्ता तक पहुंचाने में दिक्कत आती थी। कमलेश जैन ने इसी समस्या में अवसर तलाशा। उनका सवाल सीधा था, जब इस्तेमाल हो चुकी चीज में कीमती धातु मौजूद है, तो नई खदानों से वही धातु निकालने के बजाय पुराने उत्पादों से उसे वापस क्यों न हासिल किया जाए? यही सोच कंपनी के कारोबार को पारंपरिक मेटल प्रोसेसिंग से रीसाइक्लिंग की तरफ ले गई।
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग ने इस्तेमाल की गई लेड-एसिड बैटरियों की प्रोसेसिंग के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम डेवलप किया। इस प्रक्रिया में पुरानी बैटरी के अलग-अलग हिस्सों को अलग किया जाता है और सीसा निकालकर उसे रिफाइन किया जाता है।
कंपनी के अनुसार, इस प्रक्रिया से 99.97% तक शुद्धता वाला सीसा तैयार किया जा सकता है। इतनी ज्यादा शुद्धता कंपनी को सिर्फ स्क्रैप प्रोसेसर के बजाय इंडस्ट्रियल ग्रेड रीसाइकिल्ड मेटल बनाने वाली कंपनी के रूप में स्थापित करने में मदद करती है।
कंपनी ने अपना कारोबार केवल पुरानी बैटरियों तक सीमित नहीं रखा। इसका रीसाइक्लिंग पोर्टफोलियो सीसा, कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक, टिन, मेटल एलॉय और प्लास्टिक जैसी कई चीजों तक फैला है। इससे कंपनी को ऑटोमोबाइल, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर ट्रांसमिशन जैसे कई सेक्टर्स के ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिली।
कंपनी के लिए 2023 एक अहम साल रहा। इसके रिफाइंड लेड को लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME पर JAN 9997 ब्रांड नाम से रजिस्टर किया गया। लंदन मेटल एक्सचेंज दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल मेटल मार्केट में शामिल है। ऐसे में वहां रजिस्ट्रेशन सिर्फ ब्रांड की पहचान का मामला नहीं था। इससे यह दिखाने में मदद मिली कि रीसाइकिल्ड मेटल भी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतर सकता है।
जैन रिसोर्सेस रीसाइक्लिंग का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में है। कंपनी ने 120 से ज्यादा देशों में स्क्रैप सोर्सिंग का नेटवर्क तैयार किया है। यानी कारोबार केवल घरेलू कबाड़ तक सीमित नहीं है। कंपनी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से स्क्रैप खरीदती है, उसे प्रोसेस और रिफाइन करती है और फिर तैयार मेटल इंडस्ट्रियल ग्राहकों को बेचती है।
इस कारोबार का मूल मॉडल कम कीमत वाले स्क्रैप को ज्यादा मूल्य वाले कच्चे माल में बदलना है। इसके लिए कंपनी को स्क्रैप जुटाने, उसकी छंटाई, प्रोसेसिंग, धातु की रिकवरी और रिफाइनिंग से लेकर तैयार मेटल और एलॉय की बिक्री तक पूरी प्रक्रिया संभालनी होती है। इस बिजनेस की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी कितनी कुशलता से स्क्रैप खरीदती है, उसमें से कितनी उपयोगी धातु निकाल पाती है और तैयार उत्पाद की गुणवत्ता कितनी बेहतर रहती है।
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग की शुरुआत एक पारिवारिक मेटल कारोबार से हुई थी। 2022 में कंपनी को पब्लिक इकाई के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद कंपनी आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में पहुंची। मंगलवार सुबह एनएसई पर कंपनी का शेयर 0.33 फीसदी की बढ़त के साथ 291.55 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। कंपनी का मार्केट कैप इस समय 10,045.45 करोड़ रुपये पर दिखाई दिया।
वेंचरलूप की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 9,500 करोड़ रुपये रहा। इसी अवधि में कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 327 से 346 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है। कंपनी की कमाई में नॉन-फेरस मेटल कारोबार की बड़ी भूमिका है। इसमें कॉपर और एलॉय के अलावा लेड, जिंक और टिन भी शामिल हैं।
Updated on:
06 Oct 2026 12:12 pm
Published on:
06 Oct 2026 12:03 pm
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